पीपुल्स यूनिवर्सिटीमें डिजिटल युग में क्वालिटी एजुकेशन पर वेबिनार

पीपुल्स यूनिवर्सिटीमें डिजिटल युग में क्वालिटी एजुकेशन पर वेबिनार

I AM BHOPAL । पीपुल्स यूनिवर्सिटी में इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल (आईक्यूएसी) के माध्यम से शनिवार को ‘डिजिटल युग में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा के लिए व्यापक गुणवत्ता पहल और चुनौतियों’ पर एक डिजिटल राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी के दौरान शिक्षा में गुणवत्ता के उपाय और उन्हें पता लगाने के लिए उपकरण डिजिटल लर्निंग के लिए निर्देशात्मक उपकरण और वर्तमान स्थिति में शिक्षा के प्रतिमान पर विचार विमर्श किया गया। इस वेबिनार में नैक के सलाहकार डॉ. गणेश हेगड़े ने नैक द्वारा गुणवत्ता पहल के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वहीं राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान संस्थान ( कर्नाटक) के निदेशक डॉ मुनीर अहमद ने पर्यावरण के लिए शैक्षणिक अनुकूलन क्षमता के लिए परिवर्तन प्रबंधन उपकरणों के बारे में चर्चा की। आईआईटी मुंबई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विनय सैनी ने स्टार्टअप और इनोवेशन पर चर्चा की। वेबिनार के विभिन्न सत्रों का संचालन डॉ नीरजा मलिक, डॉ नीरज उपमन्यु, प्रो. अखिलेश मित्तल ने किया। इस वेबिनार में देश भर से 1500 से अधिक फैकल्टी मेंबर्स और स्टूडेंट्स ने शिरकत की।

इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स और एक्सपर्ट्स से की चर्चाए

पीपुल्स यूनिवर्सिटी के चांसलर सुरेश विजयवर्गीय ने वेबिनार के आयोजकों को बधाई दी। वहीं पीपुल्स ग्रुप की डायरेक्टर मेघा विजयवर्गीय ने कहा कि पीपुल्स यूनिवर्सिटी बुद्धिजीवियों को आमंत्रित करके संकाय सदस्यों के बीच नई सोच को बढ़ावा देती रहेगी। इस लॉकडाउन के दौरान हमने इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स, रिसर्चर्स, एजुकेशनिस्ट, मेडिकल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन इंटेलेक्चुअल प्रापर्टी(जीआईपी) और हेल्थ सर्विस इनोवेशन को समझने के लिए आमंत्रित किया। इस तरह के सेमिनार फैकल्टी मेंबर्स और स्टूडेंट्स को संबंधित क्षेत्रों में गहरी जानकारी प्रदान करेंगे।

 एजुकेशन में डिजिटलाइजेशन से तकनीकी क्रांति

पीपुल्स ग्रुप की डायरेक्टर नेहा विजयवर्गीय ने इस वेबिनार के बारे में कहा कि पीपुल्स यूनिवर्सिटी में लॉकडाउन से शैक्षणिक कार्य प्रभावित नहीं हुआ। यूनिवर्सिटी वाइस चांसलर डॉ.राजेश कपूर ने वेबिनार के उद्घाटन सत्र के दौरान कहा कि भारतीय हायर एजुकेशन प्रणाली अमेरिका और चीन के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी शिक्षा प्रणाली है। भारत में उच्च शिक्षा का डिजिटलाइजेशन अब एक तकनीकी क्रांति लाने को तैयार है। पारंपरिक शिक्षा प्रणाली पुरातन गुरु- शिष्य परंपरा के ‘ज्ञान हस्तांरतण ’ की प्रणाली पर अधारित थी, जो परस्पर संबंधों द्वारा स्थापित की गई। हालांकि डिजिटल मीडिया और इंटरनेट ने ज्ञान के लोकतंत्र में प्रवेश किया है, जहां शिक्षा एक सहयोगी व स्वचलित उद्यम बन गई है।