मध्यस्थता बनी विवादों के वैकल्पिक निराकरण की पहचान

 27 Jun 2020 08:46 AM  3

जबलपुर । मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा 10 दिवसीय आनलाइन मीडियेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम नेमा समाज द्वारा नामांकित बुद्धीजीवियों व सामाजिक रूप से सक्रिय प्रतिष्ठित 20 व्यक्तियों के मध्य संपन्न हुआ। जिसमें कहा गया कि मध्यस्थता विवादों के वैकल्पिक निराकरण की पद्धति के रूप में प्रासंगिकता व पहचान स्थापित कर चुकी है। जो कि न्यायिक बोझ, संसाधनों की कर्मी सहित अन्य बोझों को कम करने में कारगर है। उक्त मीडियेशन कार्यक्रम मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस व सालसा के मुख्य संरक्षक जस्टिस एके मित्तल व विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष जस्टिस संजय यादव के मार्ग निर्देशन में 16 से 26 जून तक प्रात: 9 बजे से 11 बजे तक आयोजित किया गया। जिसमें सालसा के वीडियो कांफ्रेंसिंग हॉल में सालसा की सदस्य सचिव पोटेंशियल टेनर मीडिएटर गिरिबाला सिंह व उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के सचिव राजीव कर्महे द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

वीसी से हुआ विचार-विमर्श

शुक्रवार को प्रशिक्षण के अंतिम दिन जस्टिस संजय यादव ने प्रतिभागियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मध्यस्थता विषय की प्रासंगिकता, मध्यस्थता के विविध पक्षों, प्रशिक्षण से प्राप्त मार्गदर्शन के साथ ही आने वाली कठिनाईयों आदि विषयों पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में डॉ. स्वाति मुखर्जी मनोचिकित्सक जिला चिकित्सालय जबलपुर, काउंसलर सुश्री मंजरी साबू द्वारा पक्षकारों की मनोदशाओं व अन्य आवश्यक पहलुओं के लिए मध्यस्थता किए जाने में एक विद्वान मध्यस्थ द्वारा ध्यान दिया जाना है। प्रशिक्षण में सालसा के उपसचिव डीके सिंह, अरविंद श्रीवास्तव व विधिक सहायता अधिकारी राजेश सक्सेना, मनीष कौशिक सहित अन्य कर्मचारीगण उपस्थित थे।