7वां करुणेश नाट्य समारोह : झूठे अस्तित्व, दंभ और कुत्सित विचारों के बीच ‘मंटो की मोज़ल’ ने बताई मंटो की जरूरत

 06 Mar 2021 08:16 PM

भोपाल। शहीद भवन में चल रहे तीन दिवसीय नाट्य समारोह के अंतिम दिन शनिवार को नाटक ‘मंटो की मोज़ल’ का मंचन किया गया। नाटक में झूठे अस्तित्व, दंभ और कुत्सित विचारों के बीच मंटो की जरूरत को दिखाया गया है। नाट्य संस्था भूमिका की ओर से प्रस्तुत हुए नाटक का रूपांतरण प्रेरणा अग्रवाल द्वारा किया गया, जबकि इसका निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी गोपाल दुबे द्वारा किया गया है। बता दें कि द् राइजिंग सोसायटी ऑफ आर्ट एंड कल्चर भोपाल की सदस्य प्रीति झा तिवारी ने बताया कि 7वां करुणेश नाट्य समारोह वरिष्ठ रंगकर्मी और फिल्म अभिनेता चंद्रहास तिवारी की याद में किया जाता है। 

 

यह है नाटक की कहानी
मंटो की मोजेल विभाजन के बाद हुए दंगो के बीच रची गई कहानी है। मोजेल जो एक खुले विचारों की लड़की है। वो बम्बई में एक फ्लैट में रहती है, वहां उसकी मुलाकात त्रिलोचन सिंह से होती है। त्रिलोचन मोजेल से प्यार करने लगता है, वो उससे शादी करना चाहता है, मोजेल बंधना नहीं चाहती और शर्त रखती है कि तुम जब केश कटवा लोगे तब शादी करूंगी, वो बल कटवा लेता है और दोनों पूना जाकर शादी तय करते हैं। अगले दिन त्रिलोचन इंतजार करता है पर मोजेल अपने एक दूसरे दोस्त के साथ उसकी मोटर से देवलाली चली जाती है, बाद में त्रिलोचन एक सिक्ख लड़की कृपाल कौर के प्रेम में पड़ जाता है। इस बीच मुंबई में दंगे हो जाते हैं। मोजेल लौट आती है, त्रिलोचन ने फिर पगड़ी पहनना शुरू कर दिया है, वो बताता है कृपाल को वो अपने घर लाना चाहता है वो मुस्लिम इलाके में रहती है, मोजेल कहती चलो ले आते है लेकिन तुम्हे पगड़ी उतार कर चलना होगा वरना मारे जाओगे। वो नहीं मानता। दोनों कृपाल कौर के घर पहुंचते है। वहां दंगाई पहुंच जाते है...मोजेल अपना चोगा(गाउन)कृपाल कौर को पहना कर भगा देती है और खुद नंगी भीड़ के बीच जाती है। सबका ध्यान उसके शरीर पर पड़ता है तब तक कृपाल भाग जाती है और उस दौरान उसकी मौत हो जाती है। खुद जान देकर दो प्यार करने वालों को मिला देती है। और सबको एक धर्म से रूबरू करा देती है ओर वो धर्म है इंसानियत।

 

मंच पर नजर आए किरदार

  • मंटो : यशील दुबे
  • मोज़ोल : सुलक्षणा पटेल
  • त्रिलोचन सिंह : उद्देश्य
  • निरंजन सिंह : रंजीत ठाकुर
  • कृपाल : अंजू चंद्रवंशी
  • पुलिस वाला : यशोवर्धन शर्मा 
  • आदमी एक : रंजीत ठाकुर

 

मंच परे

  • मंच व्यवस्थापक : उद्देश्य
  • मंच परिकल्पना : गोपाल दुबे
  • संगीत संयोजन : उद्देश्य
  • नियंत्रण : आशीर्वाद झा
  • प्रकाश : यशोवर्धन शर्मा, निश्चय दुबे
  • वेशभूषा : गोपाल दुबे
  • सहायक : सुलक्षणा पटेल, अंजू चंद्रवंशी
  • मंच सामग्री  : आशीर्वाद झा, हर्षित शर्मा
  • मंच निर्माण : रहमान शेख
  • निर्देशक : गोपाल दुबे