भास्कर समूह ने 2200 करोड़ रुपए फर्जी कंपनियों में घुमाए, 700 करोड़ पर नहीं दिया टैक्स; कर्मचारियों के आधार कार्ड पर बनाई बोगस कंपनियां

 24 Jul 2021 11:44 AM

पीपुल्स ब्यूरो, भोपाल। दैनिक भास्कर समूह पर आयकर विभाग की तीन दिन के छापे में 700 करोड़ रुपए की ऐसी आय का खुलासा हुआ है, जिस पर समूह ने 6 साल से टैक्स नहीं चुकाया। यही नहीं, भास्कर ग्रुप की कंपनियों से 2200 करोड़ रुपए के फंड ट्रांसफर की जानकारी भी मिली है। जांच में पाया गया है कि यह सभी लेन-देन काल्पनिक थे। इस राशि के एवज में किसी सामान का मूवमेंट नहीं हुआ। 2200 करोड़ की राशि पर कितना टैक्स बनेगा और किन-किन कानूनों का उल्लंघन हुआ है, उसकी पड़ताल अभी चल रही है। करोड़ों रुपए के बोगस खर्चे भी पकड़े गए हैं।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (सीबीडीटी) ने शनिवार देर रात भास्कर समूह पर हुई छापामारी के संबंध में अधिकृत प्रेस नोट जारी करते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आयकर छापे में सामने आया है कि भास्कर समूह की 100 से अधिक कंपनियां थीं। इनमें से कई कंपनियां वे अपने कर्मचारियों के नाम पर चला रहे थे, जिनमें फर्जी भुगतान और बोगस खर्चे की जानकारी सामने आई है। कई कर्मचारियों ने पूछताछ में आयकर अफसरों को बताया कि उन्हें कंपनियों में शेयर होल्डर और डायरेक्टर होने की भनक भी नहीं थी। भास्कर मैनेजमेंट ने उनके आधार कार्ड और डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग किया।

कंपनियां बनेंगी जी का जंजाल

भास्कर समूह की कंपनियां डायरेक्टर्स के लिए जी का जंजाल बनेंगी। मुंबई आयकर इन्वेस्टीगेशन विंग का सारा फोकस समूह की करीब 120 कंपनियों की पड़ताल पर है। इनमें कई तरह की अनियमितताएं मिल रही हैं। इन कंपनियों का ब्यौरा मिनिस्ट्री ऑफ  कॉर्पोरेट अफेयर्स की वेबसाइट पर मौजूद है।

कर्मचारियों को भी धोखे में रखा

बताया जाता है कई कंपनियां ऐसी मिली हैं, जिनमें कर्मचारियों को डायरेक्टर दिखाया है, जबकि उन्हें इसकी भनक भी नहीं है। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि कर्मचारियों से आधार कार्ड और डिजिटल दस्तखत लिए गए थे।

7 साल सजा, 300% जुर्माना!

आयकर एक्ट की धारा 271 एएबी के तहत टैक्स चोरी पर सजा व जुर्माने का प्रावधान है। आयकर विभाग भास्कर समूह पर 700 करोड़ रुपए की आय छिपाने और 6 साल की टैक्स चोरी पर जुर्माना, सरचार्ज और ब्याज आदि मिलाकर 700 करोड़ से अधिक की वसूली निकाल सकता है। बेनामी संपत्ति कानून में 7 साल की सजा के साथ संपत्ति राजसात किए जाने का प्रावधान है। वहीं कंपनी एक्ट और सेबी कानून के उल्लंघन पर जुर्माना और 7 साल की सजा तथा बैंक फ्रॉड एवं पीएमएलए में भी 7 साल की सजा का प्रावधान है।

घरों में मिले 26 लॉकर्स
छापे के दौरान अग्रवाल बंधुओं और उनके कर्मचारियों के घरों से विभाग को 26 लॉकर्स भी मिले हैं।

बैंक फ्रॉड भी कर डाला
भास्कर समूह ने डीबी मॉल के नाम पर बैंक से 597 करोड़ का लोन उठाया। इस रकम में से 408 करोड़ रुपए अपनी दूसरी कंपनी को एक प्रतिशत ब्याज पर सौंप दिए। इसे बैंक फ्रॉड की श्रेणी में रखा गया है। विभाग ने पड़ताल में कंपनी कानून व सेबी के नियमों का उल्लंघन भी पाया है। बेनामी संपत्तियां भी पकड़ी हैं, जिनमें अलग प्रकरण दर्ज होंगे।

100 से 300 फीसदी जुर्माना
700 करोड़ रुपए की आय पर छह साल की टैक्स वसूली के साथ विभाग इस राशि पर 100 से लेकर 300 फीसदी तक जुर्माना वसूल सकता है। सीबीडीटी का कहना है कि जांच के दौरान समूह की ऐसी कंपनियां भी मिली हैं, जिनमें भारी अनियमितताएं पाई गईं। मुंबई आयकर इन्वेस्टीगेशन विंग को समूह की 120 से अधिक कंपनियों का पता चला है। विभाग की पड़ताल का फोकस इन्हीं पर रहा। इन कंपनियों का ब्यौरा मिनिस्ट्री ऑफ कॉपोर्रेट अफेयर्स की वेबसाइट पर मौजूद है।

मांस-मछली के कारोबार से भी जुड़े रहे सुधीर अग्रवाल ! 
समूह की एक कंपनी मांस-मछली के प्रोसेसिंग-प्रिजर्वेशन कारोबार में भी रही, जिसके डायरेक्टर समूह के एमडी सुधीर अग्रवाल थे। आयकर की टीमें इन कंपनियों की बैलेंस शीट खंगालने में जुटी हैं। इन कंपनियों का ब्यौरा मिनिस्ट्री ऑफ कॉपोर्रेट अफेयर्स में मौजूद है। इनमें से कुछ कंपनियों का कारोबार कंस्ट्रक्शन, ऊर्जा, आयल एंड गैस एक्सट्रेक्शन, टेलीकम्युनिकेशन, प्रिटिंग, होटल्स और एडवरटाइजिंग का है।

विज्ञापन के बदले फ्लैट्स और बंगले

समूह की रियल एस्टेट कंपनी के एक डायरेक्टर और 2 कर्मचारियों के यहां ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनमें विज्ञापनों के बदले महंगे फ्लैट्स  व बंगलों के सौदे किए गए। भारी- भरकम नकद राशि का लेनदेन भी हुआ। कुछ संपत्तियां ऐसी भी हैं, जो बेनामी कानून की श्रेणी में आती हैं।

पीजी मिश्रा-सत्येंद्र व्यास से पूछताछ

समूह के सीएफओ पीजी मिश्रा व सत्येंद्र व्यास से कंपनियों के बारे में दिनभर पूछताछ हुई। कुछ कंपनियों में मिश्रा को भी डायरेक्टर दिखाया गया है। कोई राजेंद्र जोशी हैं, जो भी एक दर्जन से अधिक कंपनियों में डायरेक्टर हैं। इनके यहां भी जांच हो रही है, पर यह कौन हैं यह पता नहीं चल सका है।

स्कू्रटनी में लग सकते हैं कई महीने

भास्कर समूह के 7 राज्यों और 9 शहरों में फैले करीब 3 दर्जन ठिकानों में से ज्यादातर जगह शनिवार को देर रात तक भी छापे की कार्रवाई जारी थी। दरअसल समूह के वित्तीय घोटाले और कानून उल्लंघन से जुड़े साक्ष्य इतने अधिक हैं कि स्क्रूटनी की प्रक्रिया कई महीने तक चलेगी।