सत्ता-संगठन की खातिर दावेदार भोपाल - दिल्ली की लगा रहे परिक्रमा

 22 Nov 2020 12:42 AM

भोपाल। मध्यप्रदेश में 28 सीटों के उपचुनाव में मिली भाजपा को अच्छी सफलता और शिवराज सरकार को स्थायित्व के बाद सत्ता-संगठन में नए चेहरों को एडजस्ट करने की कवायद तेज हो गई है। प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी का ऐलान और मंत्रिमंडल का विस्तार जल्दी ही संभावित है। इसलिए खाली पदों के लिए दावेदारों की सक्रियता एकाएक बढ़ गई है। भोपाल से लेकर दिल्ली तक गणेश परिक्रमा के दौर शुरू हो गए हैं। भाजपा मुख्यालय में प्रदेश भर के नेताओं की भीड़ दिखने लगी है। चुनावी नतीजों के बाद पिछले एक सप्ताह से भाजपा मुख्यालय सहित सत्ता और संगठन से जुड़े दिग्गज नेताओं के घर व कार्यालयों में एकाएक जिलों से आने वाले नेताओं की संख्या बढ़ गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और पार्टी के संगठन महामंत्री सुहास भगत से लेकर दिल्ली स्थित नेताओं के ठिकानों पर भी दावेदारों की दौड़-भाग चल पड़ी है। गणेश परिक्रमा करने वालों में कई बड़े नेता भी शामिल हैं। अपनी ब्रांडिंग और लॉबिंग में जुटे कुछ दावेदार सत्ता-संगठन में क्षेत्रीय संतुलन के नाम पर परोक्ष रूप से असंतोष दर्शा कर भी अपनी दावेदारी जता चुके हैं। संभावित विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को लेकर भी अटकलें चल पड़ी हैं।

दिग्गज नेताओं की सक्रियता

भाजपा मुख्यालय में शनिवार को संगठन महामंत्री सुहास भगत से मुलाकात करने जो लोग पहुंचे उनमें पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन और राजेंद्र शुक्ला भी शािमल थे। दो दिन के दौरान वरिष्ठ नेता रतलाम विधायक चेतन काश्यप, विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया, पूर्व विधायक शंकरलाल तिवारी और सांसद संध्या राय सहित बड़ी संख्या में विधायकों ने पार्टी दμतर में अपनी आवक दर्ज कराई। इनके अलावा उपचुनाव में पराजित प्रत्याशी मुन्नालाल गोयल और रघुराज सिंह कंषाना ने भी पार्टी दμतर पहुंचकर अध्यक्ष एवं संगठन महामंत्री के समक्ष अपना पक्ष पेश किया।

सिंधिया समर्थकों की दौड़-भाग

सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के भोपाल प्रवास के दौरान भी उनके समर्थक मंत्री-विधायक और बड़ी संख्या में अन्य नेता पार्टी दμतर में सक्रिय रहे। उपचुनाव के दौरान संवैधानिक बाध्यता के चलते मंत्री पद छोड़ने वाले तुलसी राम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत के अलावा अन्य कई नेताओं की सक्रियता एकाएक बढ़ गई है। उल्लेखनीय है कि सिलावट और राजपूत फिर से मंत्री बनने की बातें अपने विधानसभा क्षेत्र में कर चुके हैं। इनके अलावा कुछ दावेदार मीडिया में भी बयानबाजी कर चुके हैं, साथ ही क्षेत्रीय और जातीय असंतुलन का मुद्दा भी उठ चुका है।