भोपाल रंग महोत्सव : सच से बचने के लिए बनावटी जीवन जीने की लालसा को दिखाता नाटक ‘कॉमेडी इन डार्क’

 26 Feb 2021 08:09 PM

भोपाल। राजधानी के शहीद भवन में इन दिनों पांच दिवसीय हास्य नाट्य एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। समारोह के तीसरे दिन मंचित किया गया नाटक ‘कॉमेडी इन डार्क’ ने नए एक्सपेरिमेंट के साथ दर्शकों को एक नए परिवेश में लेकर गए। नाटक में सच से बचने के लिए बनावटी जीवन जीने की लालसा दिखाई गई, जिससे कॉमेडी के दृश्य बनते गए। नव नृत्य नाट्य संस्था की ओर से आयोजित किए जा रहे 15वें भोपाल रंग महोत्सव में शुक्रवार को रंग माध्यम नाट्य संस्था की ओर से मंचित नाटक ‘कॉमेडी इन डार्क’ को पीटर शेफर द्वारा लिखा गया और दिनेश नायर द्वारा निर्देशित किया गया। 

ये है नाटक की कहानी 
यह एक अंकीय स्वांग नाटक है। नाटक अंधेरे में प्रारम्भ होता है, दरअसल कहानी के अनुरूप नाटक के परिवेश में अभी उजाला है। इसके कारण किरदारों के हाव-भाव और किरदारों के आपसी सम्बन्धों पर परिस्थितिवश उत्पन्न गलतफहमियों से हास्य उत्पन्न होता है। नाटक का पात्र मानस भटेजा एक मूर्तिकार है एवं उसके घर की सजावट देखने के लिए एक करोड़पति पीरू चंदानी आने वाला है। चूंकि मानस भटेजा के घर की सजावट में निम्नवर्गीय होने का एहसास होता है, इसीलिए करोड़पति को प्रभावित करने के लिए मानस भटेजा और उसकी प्रेमिका नताशा कपूर अपने पड़ोसी विवेक मुश्रान के घर पर कब्जा कर लेते हैं, जो कि काम से शहर के बाहर गया हुआ है। दोनों बिना अनुमति के उसके यहां से महँगा पुराना एंटीक फर्नीचर छोड़कर बाकी फालतू सामान हटा देते हैं। इसी बीच अचानक नताशा कपूर के पिता, मानस भटेजा को अपने दामाद के रूप में तय करने आते हैं, इतने में विवेक का भी काम ना हो पाने के कारण शीघ्र घर आना होता है। अंधेरे में विवेक मुश्रान व नताशा के पिता कुछ समझ नही पाते, तभी इलेक्ट्रीशियन आकर फ़्यूज ठीक करता है और पूरे कमरे में रोशनी हो जाती है, इससे मानस भटेजा की कारगुजारी सबके सामने आती है। इसी से नाटक का शीर्षक स्पष्ट होता है। नाटक की मूल विषयवस्तु सच से बचने के लिए बनावटी जीवन जीने की लालसा है, यही लालसा जीवन में विसंगति पैदा करती है।

मंच पर कलाकार 
मानस भटेजा: विकास शर्मा
नताशा कपूर: अधिशा नायर
सेसलिया डिसूजा उर्फ गुत्थी: मोहित हुरमाले
डीडी कूपर: रजत शर्मा
विवेक मुश्रान: दीपक तोमर
करीना गोंडवाना: आयुषी गारवे
संता कुमार (इलेक्ट्रीशियन): अभिषेक ठाकुर
 
मंच के पीछे
मंच व्यवस्थापक : विकास, क्षितिज
मंच निमार्ण: अंबुज, देवेश
मंच सामग्री: क्षितिज शर्मा
वेशभूषा: सपना पाटनकर
रूपसज्जा: अधिशा नायर
स्ांगीत परिकल्पना: रूचिर शुक्ल
प्रकाश परिकल्पना: तनवीर अहमद
मूल रचना: पीटर शेफर
अनुरचना/अनुवाद: दिनेश नायर