कई सीटों पर महिला मतदाता बदल सकती हैं उपचुनाव का रुख

 19 Oct 2020 01:13 AM  135

भोपाल। महिलाओं के किचन से महंगाई का पता चल जाता है। वर्तमान में महंगाई उच्च स्तर पर है। सब्जियों से लेकर दाल, तेल आदि के रेट लगातार बढ़ रहे हैं और महिलाएं इसे ध्यान में रखकर ही उम्मीदवार को पसंद- नापसंद पर वोट करती है। 28 सीटों के उपचुनावों में 8 से 9 सीटें ऐसी है, जिन पर हार-जीत का फैसला महिलाओं का रुख तय करेगा। यदि महिला वोटरों का मतदान प्रतिशत ज्यादा रहा तो कांग्रेस-भाजपा को मुश्किल हो सकती हैं। वैसे उपचुनाव में दोनों ही पार्टियों ने 10 फीसदी टिकट महिलाओं को दिए हैं। महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात राजनीतिक पार्टियां सालों से करती आ रही है, लेकिन उन्हें दस प्रतिशत टिकट भी नहीं दिए जाते हैं। मप्र विधानसभा में 230 सीटें होने के बावजूद 10 फीसदी महिलाओं को भी टिकट नहीं मिल पाते। 2018 के चुनाव में कांग्रेस से 9, भाजपा से 11 और बसपा से एक महिला चुनकर आर्इं थी। इनमें से कांग्रेस की तीन महिला विधायक इमरती देवी, रक्षा संतराम सरौनिया तथा सुमित्रा देवी कास्डेकर ने भाजपा का दामन थाम लिया है और अब ये भाजपा से चुनाव लड़ रही हैं। महिलाओं को जब मतदान में बराबरी का हक दिया गया है, तो टिकट देने में उनके साथ भेदभाव क्यों,यदि महिलाएं ठान लें किसी भी पार्टी को पटकनी दे सकती हैं। जो पार्टी उन्हें रिझाने में सफल रहती है, वे उसे ही अपना वोट देतीं हैं। महिलाएं वोट देने से पहले अपना मन बना लेतीं है कि उन्हें किस पार्टी को वोट देना है।

भाजपा ने दिया इन्हें टिकट

28 सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव में भाजपा ने डबरा से इमरती देवी, नेपानगर से सुमित्रा देवी कास्डेकर तथा भांडेर से रक्षा संतराम सरौनिया को टिकट दिया है।

कांग्रेस ने 10%महिलाओं को दिए टिकट

कांग्रेस ने उपचुनाव में केवल तीन प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। इनमें बड़ा मलहरा से रामसिया भारती, अशोकनगर से आशा दोहरे तथा सुरखी से पारुल साहू को मैदान में उतारा है। इस तरह दोनों ही पार्टियों ने दस- दस प्रतिशत टिकट दिए हैं। उधर, बसपा ने केवल एक प्रत्याशी स्ट्रोन बिलिन भंडारी को टिकट दिया है।

मिलना चाहिए महिलाओं को मौका

सभी पार्टियां महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात तो करती है, लेकिन टिकट देने की बारी आती है तो महिलाओं को कम टिकट दिए जाते हैं। महिलाएं परफारमेंस में पुरुषों की बराबर हैं तो उन्हें टिकट देने में भेदभाव क्यों। मौका मिलने पर वे बेहतर करेंगी।

आम चुनाव में देना चाहिए टिकट

यह उपचुनाव है और उपचुनाव में परिस्थितियां अलग होती हैं इसलिए महिलाओं को 33 प्रतिशत टिकट देना संभव नहीं है, लेकिन लोकसभा और विधानसभा के आमचुनावों में सभी पार्टियों को 33 प्रतिशत टिकट देना चाहिए। महिलाएं चाहे तो चुनाव का रुख बदल सकती हैं।