शहर के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. गुरदीप सिंह का कोरोना से निधन, शहर के नेशनल अस्पताल में चल रहा था इलाज

 18 May 2021 01:14 PM

भोपाल। राजधानी के जाने-माने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. गुरदीप सिंह का 62 वर्ष की उम्र में आज निधन हो गया। वह कोरोना से संक्रमित थे और उनका इलाज शहर के नेशनल अस्पताल में चल रहा था। डॉ. गुरदीप के मित्र डॉ. नरेन्द्र सिंह ने बताया कि डॉ. गुरदीप पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे, जब उनकी कोरोना की जांच कराई गई तो उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उनके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ। आज सुबह उनका निधन हो गया। 

बता दें कि डॉ. गुरदीप सिंह ने भोपाल में सबसे पहले लेंस इंप्लांट शुरू किया था। डॉ. गुरदीप स्व. संतोख सिंह के पुत्र थे। डॉ. संतोख सिंह गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन भी रह चुके थे और उनके परिवार में उनकी पत्नी भी नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं। 

डॉ. गुरदीप सिंह ने गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल से ऑप्थलमोलॉजी में एमबीबीएस और एमएस पूरा किया। 1987 में जीआरएमसी मेडिकल कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के रूप में सेवाएं देने से पहले वर्धा के सेवाग्राम अस्पताल में एक साल तक काम किया। उन्होंने अपने शुरुआती दौर में लेटेस्ट सर्जिकल स्किल पर फोकस किया और इसे सीखकर कई ख्यातिप्राप्त अंतर्राष्ट्रीय केन्द्रों से फेलोशिप भी प्राप्त की। 

उन्होंने किरयु नेत्र अस्पताल जापान से एफआईसीओ फेलोशिप, जर्मनी के कार्लजूए के सेंट विंसेंट अस्पताल से फॉम्स की फेलोशिप भी की। उसके बाद, वह रॉयल विक्टोरिया अस्पताल में विटेरोरेटिनल सर्जरी में प्रशिक्षण लेने के लिए मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया में काम करने चले गए।

  • 1986 में मोतियाबिंद की सर्जरी के लिए इंट्रोक्युलर लेंस लगाने वाले मध्य प्रदेश में पहले चिकित्सक थे। 
  • डॉ. गुरदीप ने राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय और राज्य सम्मेलनों में विभिन्न प्रस्तुतिकरण पेश किए हैं। उन्हें पूरे भारत में विभिन्न कार्यशालाओं में तिथि संकाय और अतिथि सर्जन के रूप में भी आमंत्रित किया गया। 
  • विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नेत्र विज्ञान पत्रिकाओं में उनके कई प्रकाशन हैं।
  • उनकी रुचि के क्षेत्र मोतियाबिंद, विटेरियोरेटिनल और लेजर सर्जरी हैं।

चिकित्सा जगत में शोक की लहर
डॉ. गुरदीप सिंह के निधन की सूचना मिलते ही चिकित्सा जगत में शोक की लहर छा गई है। गांधी मेडिकल कॉलेज एलुमिनाई के सेक्रेटरी और भोपाल डिविशनल ओफ्थलमिक सोसाइटी के प्रेसीडेंट डॉ. ललित श्रीवास्तव ने बताया कि डॉ. गुरदीप ने गांधी मेडिकल कॉलेज से 1982-83 में एमबीबीएस की और 1986 में एमएस नेत्र रोग पास  कर लेक्चरर एवं रीडर के पद पर सेवाएं दी। 1997 में सरकारी नौकरी से त्यागपत्र देकर अपनी निजी प्रैक्टिस शुरू की और एक सफल नेत्र चिकित्सक का दर्जा हासिल किया। डॉ. श्रीवास्तव ने डॉ. गुरदीप के निधन पर कहा कि वह सहज सरल,सभी की मदद करने वाला नेत्र चिकित्सक थे और अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हुए कोरोना का शिकार हो गए और आज अपने जीवन को अलविदा कहकर चले गए। हम सभी शासकीय, निजी चिकित्सकों और गांधी मेडीकल कॉलेज के समस्त एलुमिनी की ओर से अश्रुपूरित हार्दिक श्रंद्धाजलि।