सरकारी आवासों का किराया देने में पीछे माननीय, संस्थाओं पर भी लाखों बकाया

 21 Apr 2021 01:03 AM

भोपाल। राजधानी भोपाल में आवंटित शासकीय आवासों का मासिक किराया चुकाने में राजनैतिक, कर्मचारी, अधिकारी संगठन और सामाजिक संस्थाएं ही नहीं बल्कि विधायक और सांसद भी पीछे हैं। समाजवादी पार्टी की मप्र इकाई पिछले करीब दो साल से भंग है लेकिन पार्टी के नाम पर आवंटित आवास अबतक नहीं खाली कराया गया और न ही बकाया की वसूली हुई। सचिव महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान पर साढ़े तीन करोड़ से अधिक का किराया बकाया होने की जानकारी सामने आई है। गृह विभाग द्वारा सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद राजनैतिक, सामाजिक, कर्मचारी, अधिकारी सहित विधायक, सांसद और पत्रकारों को शासकीय आवास आवंटित किए जाते हैं। विधायकों को विधानसभा के माध्यम से भी अवास दिए जाते हैं। संपदा संचालनालय के रिकार्ड अनुसार सरकारी आवासों का मासिक किराया कई संस्थाओं पर बकाया हो गया है। संपदा ने अनाधिकृत मानते हुए जुर्माना भी ठोंका है बावजूद वसूली नहीं हो सकी।

इनकी नस्ती उपलब्ध नहीं

गृह विभाग की एक जानकारी के अनुसार तीन आवासों पर बकाया होने से संबंधित जानकारी ही उपलब्ध नहीं है। विभाग ने नस्ती उपलब्ध नहीं होना बताया है। इनमें जनता पार्टी कार्यालय-एफ-142/1 प्रोफेसर कॉलोनी, मप्र राजपत्रित कर्मचारी संघ एफ-85/51 तुलसी नगर और रघुराज सिंह एफ-5/ 18 चार इमली है।

इन माननीयों पर भी रहा बकाया

सांसद नकुलनाथ, प्रज्ञा भारती, कृष्णपाल सिंह यादव और रमाकांत भार्गव। विधायक करण सिंह वर्मा, नागेन्द्र सिंह, विशाल पटेल, विनय सक्सेना, रवि जोशी, नीरज दीक्षित, राजेन्द्र शुक्ल, दिलीप सिंह गुर्जर, संजय यादव, पारस जैन, राहुल सिंह लोधी (पूर्व), संजीव सिंह, कुनाल चौधरी, आरिफ मसूद, गौरीशंकर बिसेन, नीना वर्मा, राणा विक्रम सिंह और तुलसी राम सिलावट।

गृह विभाग यह करता है कार्रवाई

शिकायत प्राप्त होने पर जांच कराई जाती है और नियमानुसार मध्यप्रदेश लोक परिसर (बेदखली) अधिनियम 1974 अंतर्गत निष्कासन प्रकरण पंजीबद्ध कर बेदखली की कार्यवाही की जाती है।

मेरा संपदा से तबादला हो गया है

मेरा संपदा संचालनालय से खरगोन तबादला हो गया है। खरगोन में ज्वाइन भी कर लिया है। संपदा संचालनालय किसको भेजा है, नहीं पता। वैसे अनाधिकृत रह रहे लोगों को नोटिस देने के बाद बेदखली की कार्रवाई की जाती है। बकाया राशि जमा करने के लिए पूर्व में नोटिस दिए गए थे। लोचनलाल अहिरवार, तत्कालीन संचालक संपदा संचालनालय