राजधानी में बनने से पहले ही बिक जाएंगे मेट्रो स्टेशन, निजी कंपनियों को रहेगी छूट

 18 Oct 2020 01:11 AM  64

भोपाल। राजधानी में मेट्रो ट्रेन जिन पिलर्स, स्लैब और ट्रैक पर दौड़ेगी, वह सरकारी होंगे, लेकिन जिन स्टेशनों पर रुकेगी, उन पर निजी कंपनियों का मालिकाना हक होगा। क्योंकि मेट्रो स्टेशन बनने से पहले ही निजी कंपनियों को बेचने का मसौदा तैयार है। कंपनियां स्टेशन बिल्डिंग्स का न सिर्फ कॉमर्शियल इस्तेमाल कर सकेंगी, बल्कि उन्हें स्टेशनों के आसपास की जमीन बेचने की आजादी होगी। राज्य सरकार को मेट्रो स्टेशन बेचने का आइडिया केंद्र सरकार के रेलवे स्टेशन रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट से आया है। भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट की टोटल कॉस्ट 6962.92 करोड़ है। इसमें से राज्य सरकार आधी रकम 3885 करोड़ का इंतजाम कर्ज लेकर करेगी। जबकि 1295 करोड़ की मदद उसे सेंट्रल गवर्नमेंट से मिलेगी। ऐसे में उसे बाकी 1782 करोड़ का इंतजाम खुद करना है। लिहाजा मेट्रो कंपनी इसका इंतजाम निजी इन्वेस्टमेंट से करेगी।

इन दो रूटों पर चल रहा है काम

रूट नंबर एक करोंद से एम्स तक

करोंद चौराहा, भोपाल टॉकीज, रेलवे स्टेशन, भारत टॉकीज, बोगदा पुल, सुभाष नगर अंडरब्रिज, डीबी मॉल बोर्ड आॅफिस चौराहा, हबीबगंज नाका, अलकापुरी बस स्टैंड और एम्स। लंबाई : 14.99किमी

रूट नंबर दो भदभदा से रत्नागिरि

भदभदा, डिपो चौराहा, जवाहर चौक, रोशनपुरा चौराहा, मिंटो हॉल, लिली टॉकीज, जिंसी डिपो, बोगदा पुल, प्रभात चौराहा, अप्सरा टॉकीज, गोविंदपुरा इंडस्ट्री एरिया से जेके रोड, रत्नागिरि।

प्लान में शामिल किया टीडीआर और टीओडी

मेट्रो कंपनी ने प्लान में ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) के साथ ट्रांजिट ओरियंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) को भी शामिल किया है। इसके तहत 73 किमी लंबे मेट्रो नेटवर्क में औसत 800 मीटर से 1000 मीटर पर एक स्टेशन बनाया जाएगा। ऐसे में स्टेशनों की संख्या 86 होगी, जिनमें से 72 स्टेशन एलीवेटेड कॉलम पर तैयार होंगे। इन्हें मल्टी यूटीलिटी कॉम्पलेक्स से जोड़ा जाएगा।