सुकन्या समृद्धि में शिखर से फिसला मप्र, 2 साल से था टॉप पर

 12 Jun 2021 12:21 AM

भोपाल। बालिकाओं को शिक्षित और समृद्ध बनाने वाली मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना सुकन्या समृद्धि में इस साल मध्यप्रदेश अपनी पहली पोजीशन से नीचे फिसल गया। पोस्ट आॅफिस के जरिए सुकन्या समृद्धि के सबसे ज्यादा खाते खोलने में इस बार कर्नाटक ने बाजी मार ली। उत्तरप्रदेश और बिहार की तुलना में भी मप्र पिछड़ गया, कोरोना महामारी के चलते यह नौबत आई। सुकन्या समृद्धि योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है। छह साल पहले देश भर में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के तहत इस योजना में मप्र वर्ष 2019 और 2020 में लगातार सिरमौर बना रहा। मप्र ने गांव और शहरों में 4 लाख 70 हजार खाते खोलकर देश में अव्वल स्थान हासिल किया था। अन्य सभी राज्य इस मामले में काफी पीछे रहे, लेकिन इस साल कोरोना महामारी के चलते ज्यादातर समय लॉकडाउन में निकल गया। इससे डाकघरों में कार्यरत ग्रामीण डाक सेवक और अन्य कर्मचारी अतिरिक्त प्रयास नहीं कर पाए। इसलिए प्रभावित हुई योजना: कोरोना महामारी तो अन्य राज्यों में भी थी] लेकिन मध्यप्रदेश के ग्रामीण अंचलों में इस दौरान महिला बाल विकास विभाग के कर्मचारी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी बेटियों को समृद्ध बनाने की इस योजना के लिए घर-घर दस्तक देने नहीं निकल पाए।

बेटी के 21 साल की होने पर मिलेंगे 35 लाख रुपए

योजना के तहत सबसे ज्यादा दरों पर चक्रवृद्धि ब्याज बच्ची के खाते में जुड़ता है। 10 साल तक की बच्ची के नाम पर खाता खोला जा सकता है, जो कि लड़की के 21 साल की होने पर ही राशि वापस मिलती है। एक साल की बेटी के लिए यदि हर महीने 10 हजार रुपए 14 साल तक जमा किए जाएं, तो बेटी के 21 साल होने पर 35 लाख रुपए वापस मिलेंगे। हर महीने न्यूनतम 250 रुपए भी जमा करने का प्रावधान है।