अवैध शराब पर रोक के लिए प्रदेश में यूपी जैसा कानून लाने की सिफारिश

 19 Jan 2021 01:37 AM

भोपाल। मुरैना में जहरीली शराब पीने से 26 लोगों की मौत के मामले में एसीएस गृह डॉ. राजेश राजौरा की अध्यक्षता में गठित एसआईटी ने 10 बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है। जांच रिपोर्ट में प्रदेश में अवैध शराब बनने और बाहरी राज्यों से शराब की खेप आने पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को सुझाव दिए गए हैं। खासकर अवैध शराब पर रोक लगाने के लिए यूपी जैसे सख्त कानून को लागू करने की अनुशंसा की गई है। यूपी की आबकारी नीति में नई धारा-60 (क) जोड़ी गई है, जिसमें अवैध शराब बेचने या उपभोग के लिए उपलब्ध करवाने से किसी व्यक्ति की मृत्यु अथता स्थायी अपंगता होने पर आजीवन कारावास या 10 लाख रुपए की सजा का प्रावधान है।

सीएम को सौंपी गई रिपोर्ट के बिंदु

प्रदेश में अवैध शराब का कारोबार करने वालों पर धारा 134 में करवाई की जाती है, जिसमें तत्काल जमानत हो जाती है।

ऐसे में एक-एक व्यक्ति पर 30-40 तक मुकदमे दर्ज हैं, लेकिन वे अवैध कारोबार जारी रखते हैं।

आबकारी नीति में भी संशोधन करने की जरूरत है, क्योंकि कानून के प्रावधान बेहद कमजोर हैं।

वर्तमान आबकारी नीति में बड़े ठेकेदारों को 2 से 3 जिलों के ठेके दिए हैं, ऐसे में ठेकेदार अपनी मोनोपॉली बनाकर एमआरपी से ज्यादा रेट पर शराब बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं।

शराब महंगी होने का फायदा अवैध शराब का कारोबार करने वाले उठा रहे हैं, वे अवैध शराब बनाकर गरीबों को सस्ते दाम पर दे रहे हैं।

आबकारी नीति में ज्यादा टैक्स होने के कारण प्रदेश में अन्य राज्यों की तुलना में शराब महंगी है।

मप्र में हरियाणा, यूपी और गुजरात सहित अन्य राज्यों से प्रदेश में अवैध शराब आ रही है।

रिपोर्ट में कहा है कि मप्र में आबकारी टैक्स में संशोधन करने की जरूरत है। इससे भी अवैध निर्माण घटेगा।

नीति ऐसी बनाई जाए, जिसमें सरकार को नुकसान भी न हो और लोगों को सस्ती शराब उपलब्ध हो।

वर्तमान में शराब दुकान पर पाव 80 रुपए में मिलता है, जबकि अवैध कारोबारी उसे 40 रुपए में बेचते हैं। यही वजह है कि लोग अवैध शराब लेते हैं। एक पाव शराब बनाने पर 14 से 16 रुपए खर्च होते हैं।

मप्र के गांव में दुकानें खुलने से लगेगी रोक

नए वित्तीय वर्ष के लिए शराब नीति में दुरस्थ गांवों में सरकारी शराब दुकानें खोले जाने के संबंध में मैं मुख्यमंत्री से चर्चा करूंगा। दूरस्थ गांव में सरकारी शराब दुकानें खुलने से अवैध शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लग सकेगा।