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सिकल सेल एनिमिया का पता करने की पोर्टेबल मशीन भोपाल के डॉक्टर के साथ मिलकर कर बनाई वैज्ञानिकों ने

 08 Jun 2021 04:47 PM

भोपाल। सिकल सेल एनिमिया की टेस्टिंग की जटिल और खर्चीली प्रणाली को देश के वैज्ञानिकों ने गवर्नमेंट होम्योपैथिक कॉलेज, भोपाल के डॉक्टर के साथ मिल कर आसान बना दिया है। इससे देश के लाखों सिकल सेल एनिमिया के मरीजों की टेस्टिंग और इलाज काफी आसान हो सकेगा।

इंस्टीट्यूट ऑफ इंस्ट्रूमेंटेशन और एप्लाइड फिजिक्स, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंग्लुरू (IISC) ने सिकल सेल एनिमिया का पोर्टेबल टेस्ट उपकरण विकसित किया है जिसकी मदद से करीब 5 मिनट में ही बीमारी का पता लगाया जा सकेगा। खास बात यह है कि यह इंट्रूमेंट इतना छोटा है कि इसे मेडिकल टीम अपने साथ दूरदराज के क्षेत्रों में ले जा सकती है और सटीकता से तुरंत टेस्ट करके मरीजों का इलाज शुरू कर सकती है।

इस इंस्ट्रूमेंट की मदद से बीमार व्यक्ति की एक बूंद खून से ही कुछ ही देर में सिकल सेल एनिमिया का पता चल सकेगा। अब तक इसके लिए अमेरिकी मशीन की जरूरत होती थी। इसमें पहले सैंपल कलेक्ट करना होता था जिसे 2 से 8 डिग्री सेंटिग्रेड तक रख कर लैब ले जाना होता था। लैब में एक अन्य मशीन से टेस्ट के बाद बीमारी का पता चलता था।

क्यों पड़ी उपकरण की जरूरत :

शासकीय होम्योपैथिक कॉलेज के शोधकर्ता डॉ. निशांत नम्बिसन को सिकल सेल एनिमिया के इलाज के दौरान दूर-दराज के इलाकों में जाकर बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने IISC बेंग्लूरू के प्रोफेसर साईं गोरथी के सहयोग से सिकल सेल ट्रैट और सिकल सेल रोग के बीच का अंतर कम करने के लिए पहला पॉइंट ऑफ केयर कंफर्मेटरी टेस्ट का आविष्कार किया। इसे हाई परफॉर्मेंस ऑप्टिकल टेस्टिंग सेंसर (HPOS) नाम दिया गया।

HPOS को प्रोफेसर साईं शिव गोरथी (डिपार्टमेंट ऑफ इंस्ट्रूमेंटेशन एंड एप्लाइड फिजिक्स), भारतीय विज्ञान संस्थान, प्रोफेसर डॉक्टर के एम नम्बिसन (शासकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, भोपाल) की देख रेख में वैज्ञानिकों राजेश श्रीनिवास, यूजीन क्रिस्टो वीआर, प्रतीक कटारे, अरविंद वेणुकुमार की टीम ने विकसित किया।