‘हाइड्रो डिस’ तकनीक के जरिए बिना केमिकल साफ होगा पानी

 14 Jan 2021 01:32 AM

भोपाल। पानी को शुद्ध करने के लिए अब किसी तरह के केमिकल की जरूरत नहीं होगी, बल्कि पानी से ही क्लोरीन बनेगी और उसी से पानी शुद्ध हो जाएगा।ऑस्ट्रेलिया की इस हाइड्रो डिस तकनीक के पायलट प्रोजेक्ट पर मप्र में भी काम चल रहा है। राजस्थान व नागालैंड समेत 9 राज्यों में इसे स्वीकृति मिल चुकी है। मप्र में प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिली तो म्युनिसिपल कॉपोर्रेशन व अस्पतालों जैसी जगहों पर बैक्टीरिया फ्री पानी के लिए यह तकनीक इस्तेमाल की जाएगी। दावा है कि यह तकनीक कोविड बैक्टीरिया को भी 100 फीसदी तक पानी से निकाल देता है। दीमापुर के एक गांव के लिए वहां के मंत्री टोंगपैंग ओजुकुम ने इस प्लांट का शुभारंभ किया है। आखिर कैसे काम करती है हाइड्रो डिस तकनीक : यह टाइटेनियम ट्यूब तकनीक है। इसे पानी की लाइन के बीच में जोड़ देते हैं। इस ट्यूब में विशेष प्रकार का लेप लगा होता है। पानी इस ट्यूब से गुजरता है, तो बैक्टीरिया फ्री हो जाता है। इसके वेस्ट हुए पानी को टॉयलेट क्लीनिंग, गार्डन और गाड़ी धुलाई आदि में इस्तेमाल कर किया जा सकता है। हाइड्रो डिस इन सीटू इलेक्ट्रो कैटलिटिक आॅक्सीडेंट जनरेटर एक डुअल डिसइनफैक्टेंट है। यह डिसइन्फैक्टेंट खुद जेनरेट करता है। पानी में हाइड्रॉक्सिल रेडिकल्स अपने आप बनते हैं और सूक्ष्म जीवाणुओं को नष्ट करके पानी को बैक्टीरिया फ्री करते हैं।

इस तकनीक के फायदों पर भी एक नजर

􀂄 न्यूनतम खर्च में पेयजल एवं वेस्ट वॉटर के ट्रीटमेंट की स्वचालित सुविधा।

􀂄 सेल्फ क्लीनिंग की सुविधा इस टेक्नालॉजी को लंबा जीवन प्रदान करने के साथ खर्च बचाती है।

􀂄 यह सौर व पवन ऊर्जा से भी चल सकता है, जिससे बिजली की बचत होती है।

􀂄 ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों तथा आपात उपयोग के लिए यह एक आदर्श टेक्नोलॉजी है।

􀂄 इसमें रसायनों का उपयोग नहीं होता, इसलिए यह पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है।

􀂄 इस सिस्टम को टंकी के बाहर लगा लेते हैं तो नलों से जो भी पानी आएगा वह 100 फीसदी बैक्टीरिया फ्री होगा।

􀂄 यह एनजीटी के स्टैंडर्ड के आधार पर बैक्टीरिया फ्री पानी मुहैया कराता है।