Breaking News

विधवाओं का दुख

 03 Dec 2020 02:06 AM

भोपाल। भोपाल गैस त्रासदी को 36 साल बीत गए हैं। लेकिन इसका दर्द बाकी है। वो महिलाएं ज्यादा दुख भुगत रही हैं, जिनके पति गैस त्रासदी में जान गंवा चुके हैं। इन विधवाओं को राहत देने के लिए सरकार ने मुआवजा दिया और गुजारे के लिए पेंशन भी दी। वे जैसे-तैसे जिंदगी गुजार रही थीं, कि सरकार ने उन्हें मिलने वाली 1000 रुपए गुजारा पेंशन अचानक बंद कर दी। नतीजतन इन विधवाओं के सामने पिछले एक साल से रोटी के भी लाले हैं। हालत ये है कि इन बुजुर्ग हो चुकी विधवाओं को या तो भीख मांगनी पड़ रही है या घर-घर जाकर बर्तन मांजने पड़ रहे हैं। गैस त्रासदी की 36वीं बरसी के मौके पर पीपुल्स समाचार ने इन विधवाओं का हाल जाना। बदहाली में रह रहीं इन विधवाओं ने बताया कि पेंशन बंद होने से वे एक नई त्रासदी के दौर से गुजर रहीं हैं। दो बार बंद की गई पेंशन: प्रदेश सरकार ने बजट के नाम पर पहले अप्रैल 2016 में पेंशन बंद की थी, जिसे आंदोलन के बाद दिसंबर 2017 में शुरू किया गया। अब दिसंबर 2019 में पेंशन बंद कर दी गई।

गैस पीड़ित महिलाओं की पेंशन फिर से होगी बहाल

संयुक्त संचालक सामाजिक न्याय भोपाल आरके सिंह ने ऐसी गैस पीड़ित महिलाएं जिनको गैस राहत विभाग और नगर निगम से पेंशन मिलना बंद हो गई है, उनसे पुन: आवेदन करने की अपील की है। वे समग्र आईडी, आधार, फोटो, पति का मृत्यु प्रमाण-पत्र एवं बैंक पासबुक लेकर निकटतम वार्ड कार्यालय में संपर्क कर सकती है।

आसपास से मांग कर गुजारा करती हैं

गैस राहत कॉलोनी में कलाबाई सरकार से मिले दो छोटे-छोटे कमरों के घर में रहती हैं। इनमें से एक कमरा बेतरतीब रसोई की शक्ल लिए है, जिसमें एल्युमिनियम का छोटा भगोना थाली, गिलास और कटोरी बिखरे हैं। दूसरे कमरे में ओढ़ने-बिछाने के कपड़े, कंबल, चादर हैं। वे अकेली हैं। दो बेटे हैं, जो छोला में रहते हैं। वे बताती हैं कि एक साल पहले तक पेंशन मिलती थी, उससे गुजारा हो जाता था, लेकिन अब आस-पास से मांगकर गुजारा करना पड़ता है।

दो वक्त की रोटी जुटाना हो रहा मुश्किल

ग्यारसी बाई तीन अधेड़ बेटियों के साथ गैस राहत कालोनी में रहती हैं। दो बेटियों के पतियों की मौत हो चुकी है। तीसरी बेटी अविवाहित है। चारों मां-बेटी एक-दूसरे का सहारा हैं। ग्यारसी बाई को गुजारा पेंशन मिल जाती थी, जिससे घर खर्च चल जाता था। अब बेटियां दो वक्त की रोटी के लिए घरों में काम करती हैं। ग्यारसी बाई का कहना है कि पेंशन नहीं मिलने से दिक्कतें बढ़ गई हैं। कई बार तो घर में दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो जाता है।

पेंशन नहीं मिलने से भीख मांगने की नौबत

विधवा कालोनी में रहने वाली कस्तूरी बाई के दो बेटे हैं। दोनों अलग रहते हैं। एक बेटा सब्जी का ठेला लगाकर परिवार चलाता है। कस्तूरी बाई ने बताया कि अभी तक मजदूरी करके घर चल जाता था, लेकिन अब हाथ पैर नहीं चलते हैं और साल भर से पेंशन भी नहीं मिल रही। भीख मांगकर पेट भरना पड़ रहा है।