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कपड़ा निर्यातकों के लिये करों, शुल्कों में छूट आगे जारी रहगी

 15 Jul 2021 01:35 AM

नई दिल्ली। कपड़ा निर्यातकों को उनके निर्यात पर केंद्रीय और राज्य करों में छूट पहले की तरह मिलती रहेगी। सरकार ने बुधवार को कपड़ा निर्यात के लिये राज्य और केंद्रीय करों तथा शुल्कों में छूट (आरओएससीटीएल) योजना मार्च, 2024 तक जारी रखने को मंजूरी दे दी। इस पहल का मकसद श्रम गहन कपड़ा क्षेत्र की प्रतिस्पर्धी क्षमता को बढ़ाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में आरओएससीटीएल योजना जारी रखने को मंजूरी दी गयी। यह मंजूरी उसी समान दर पर दी गयी है जिसकी अधिसूचना कपड़ा मंत्रालय ने परिधान निर्यात और मेड अप (चादर, कंबल, कालीन आदि) निर्यात के लिये जारी की थी। सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा, योजना 31 मार्च, 2024 तक जारी रहेगी। इससे निर्यात और रोजगार सृजन में मदद मिलेगी। इस योजना के दायरे में आने वाले क्षेत्रों (कपड़ा/परिधाम और मेड अप) को निर्यात उत्पादों पर शुल्क और करों से छूट (आरओडीटीईपी) योजना का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि, वाणिज्य मंत्रालय द्वारा तैयार नियम के अनुसार जो कपड़ा उत्पाद आओएससीटीएल योजना के अंतर्गत नहीं आएंगे, वे अन्य उत्पादों के साथ आरओडीटीईपी योजना का लाभ लेने के लिये पात्र होंगे। योजना का क्रियान्वयन राजस्व विभाग डिजिटल रूप से करेगा। इसके तहत हस्तांतरणीय ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप (बीजक या पर्ची) जारी किया जाएगा। इसे सीमा शुल्क प्रणाली में इलेक्ट्रॉनिक रूप से रखा जाएगा। आओएसीसीटीएल योजना को जारी रखने और उसके क्रियान्वयन के बारे में कपड़ा मंत्रालय राजस्व विभाग के परामर्श से संशोधित दिशानिर्देश जारी करेगा। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, कपड़ा- परिधान और मेड-अप के लिए आरओएससीटीएल जारी रखने से करों और शुल्कों पर छूट जारी रहेगी। इससे ये उत्पाद वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे...। इस योजना के तहत, निर्यातकों को निर्यात किए गए उत्पाद में निहित करों और शुल्क के मूल्य के लिए एक ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप यानी बीजक जारी की जाती है। निर्यातक इस बीजक का उपयोग उपकरण, मशीनरी या किसी अन्य कच्चे माल के आयात के लिए मूल सीमा शुल्क का भुगतान करने के लिए कर सकते हैं।

एईपीसी के चेयरमैन बोले-वैश्विक स्पर्धा में मिलेगी मदद

सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि यदि निर्यातक को अपने निजी उपयोग के लिए इसकी आवश्यकता नहीं है, तो वे इसे किसी अन्य आयातक को हस्तांतरित कर सकते हैं। इससे पहले, आरओएससीटीएल योजना के तहत परिधान के लिए छूट की अधिकतम दर 6.05 प्रतिशत थी जबकि मेड-अप के लिए यह 8.2 प्रतिशत तक थी। इस निर्णय के बारे में कपड़ा निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के चेयरमैन ए शक्तिवेल ने कहा कि योजना को आगे बढ़ाये जाने से निर्यातकों को सभी देय कर प्राप्त करने और उत्पादों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, ह्यह्ययह योजना क्षेत्र में सकारात्मक भावनाओं को वापस लाने और भारतीय कपड़ा मूल्य शृंखला को अगले तीन साल में 100 अरब डॉलर का सालाना निर्यात हासिल करने में मदद करेगी। शक्तिवेल ने यह भी कहा कि योजना लाखों की संख्या में नये रोजगार सृजित करने के लिहाज से एक महत्वपूर्ण रणनीतिक निर्णय साबित होगी। सरकार ने योजना के लाभों को एक जनवरी, 2021 से मार्च 2024 तक बढ़ा दिया है।