हॉलमार्किंग : सस्ते के नाम पर धोखा खाने से बचें, प्रति ज्वेलरी पर खर्च होंगे सिर्फ रु.35

 15 Apr 2021 12:57 AM

नई दिल्ली। केंद्र सरकर ने 1 जून से सोना खरीदने के नियमों में बदलाव किया है। 1 जून के बाद हॉलमार्क को जरूरी कर दिया है। 1 जून 2021 से बिना हॉलमार्क वाले गोल्ड ज्वैलरी को न बेचा जा सकेगा और न ही आप इसे खरीद सकेंगे। ब्यूरो आॅफ इंडियन स्टैंडर्ड की ओर से इसे लेकर सभी ज्लैवर्स एसोसिएशन को नोटिफिकेशन जारी किया गया है। 1 जून से ज्वैलर्स सिर्फ तीन ग्रेड का सोना बेच सकेंगे, जो 22 कैरेट, दूसरा 18 कैरेट और 14 कैरेट के होंगे। ऐसे में यह जानकारी होना जरूरी है कि हॉलमार्र्किंग की अनिवार्यता क्यों है? सोना खरीदने से मन में आशंका बनी रहती है। वहीं, हॉलमार्क सरकारी गारंटी है। हॉलमार्क का निर्धारण भारत की एकमात्र एजेंसी ब्यूरो आॅफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) करती है। हॉलमार्किंग में किसी उत्पाद को तय मापदंडों पर प्रमाणित किया जाता है। बीआईएस वह संस्था है, जो सोने के गुणवत्ता स्तर की जांच करती है। सिक्के या गहने कोई भी सोने का आभूषण जो बीआईएस द्वारा हॉलमार्क है, उस पर बीआईएस का लोगो लगाना जरूरी है। इससे पता चलता है बीआईएस की लाइसेंस प्राप्त प्रयोगशालाओं में इसकी शुद्धता की जांची गई है। हॉलमार्क महंगा होने के नाम पर ज्वैलर आपको सस्ती ज्वेलरी की पेशकश करते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का का कहना है कि प्रति ज्वेलरी हॉलमार्क का खर्च महज 35 रुपए आता है। सोना खरीदते वक्त आॅथेंटिसिटी /प्योरिटी सर्टिफिकेट जरूर लेना चाहिए। सर्टिफिकेट में कैरेट गुणवत्ता भी चेक करें। ज्वेलरी में लगे जेम स्ट

हॉलमार्क की प्रमुख पहचान

􀁺 ज्वैलरी मार्किंग का वर्ष

􀁺 ज्वेलर्स की पहचान बताता लोगो

􀁺 उस पर हॉलमार्किंग केन्द्र का लोगो होता है

􀁺 सोने की शुद्धता की ग्रेड

􀁺 बीआईएस का लोगो भी

ऐसे करें शुद्धता की पहचान

- 24 कैरेट शुद्ध सोने पर 999, 22 कैरेट की ज्वेलरी पर 916 लिखा होता है। 21 कैरेट सोने की पहचान है 875 लिखा होना। 18 कैरेट की ज्वेलरी पर 750, वहीं 14 कैरट ज्वेलरी पर 585 लिखा होता है।