मुकेश अंबानी को पछाड़कर एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने जुंग शानशान, जानें इनके बारे में

 01 Jan 2021 01:15 PM

मुंबई। मुकेश अंबानी के लिए नए साल की शुरुआत अच्छी नहीं रही है। वह एशिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट से बाहर हो गए हैं। इससे पहले वह दुनिया के शीर्ष 10 अमीरों की लिस्ट से बाहर हो गए थे। चीन के जुंग शानशान भारतीय उद्योगपति मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ते हुए एशिया के सबसे धनी व्यक्ति बन गए हैं। ब्लूमबर्ग बिलिनियर्स इंडेक्स के मुताबिक, साल 2020 में शानशान की संपत्ति में सात अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने यह मुकाम अपने बोतलबंद पानी और वैक्सीन बनाने वाली कंपनी की बदौलत हासिल किया है।

ब्लूमबर्ग की सूची के मुताबिक, साल 2020 में जांग शानशान की सपत्ति में सात अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है जिसके चलते उनकी कुल संपत्ति बढ़कर 77.8 अरब डॉलर हो गई है। इस बढ़ोतरी ने उन्हें एशिया का सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। वहीं, मुकेश अंबानी की संपत्ति 76 अरब डॉलर है। वहीं दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में उनका नंबर 11वां हो गया है। 

एशिया के सबसे अमीर शख्स बनने से पहले जांग ने पत्रकारिता, मशरूम की खेती से लेकर स्वास्थ्य क्षेत्र में हाथ आजमाया था। जुंग ने इस साल अप्रैल में वैक्सीन बनाने वाली कंपनी बीजिंग वान्टई बॉयोलॉजिकल को चीन के शेयर बाजार में लिस्ट कराया था। इसी तरह तीन महीने बाद जुंग ने अपनी बोतलबंद पानी की कंपनी नॉन्गफू स्प्रिंग को हॉन्गकॉन्ग शेयर बाजार में सूचीबद्ध किया।

शेयर बाजार में लिस्ट होते ही उनकी किस्मत बदल गई है। शेयर बाजार में लिस्टिड होने के बाद से अब तक नॉन्गफू स्प्रिंग की कीमत में 155 प्रतिशत का उछाल आया है जबकि वांटई बॉयोलॉजिकल के शेयरों में 2000 प्रतिशत की भारी बढ़त देखी गई। ब्लूमबर्ग ने उन्हें दुनिया में सबसे तेजी से अपनी संम्पत्ति में इजाफा करने वाली सूची में भी जगह दी है।

जांग शानशान के एशिया में सबसे अमीर बनने के पीछे कोरोना भी बड़ी वजह है। उनकी कंपनी वांटई बॉयोलॉजिकल कोरोना की वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों में शामिल है। कंपनी के शेयरों में उछाल की ये भी एक बड़ी वजह है। इस सप्ताह जांग की कंपनी नोंगफू के शेयर चरम पर पहुंच गए जब सिटी बैंक के विश्लेषकों ने कहा कि कंपनी ने बाजार का अपना प्रभुत्व मजबूत किया है और नकदी का प्रवाह बना हुआ है। जांग शानशान के अमीरों की लिस्ट में आगे निकलने की एक वजह चीन की दिग्गज टेक कंपनियों पर सरकार की बढ़ती निगरानी भी है जिसके चलते इन कम्पनियों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।