मध्य प्रदेश में मानसून की सक्रियता ने सोयाबीन में नई जान फूंकी

 27 Jul 2021 01:00 AM

इंदौर देश के सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक मध्य प्रदेश में मानसून की लम्बी खेंच के बाद पिछले एक हμते से जारी बारिश के चलते किसानों के चेहरे खिल गए हैं और इसने तिलहन फसल में नई जान फूंक दी है। इंदौर जिले के सोयाबीन उत्पादक किसान अरुण पटेल ने सोमवार को कहा कि मैंने 70 एकड़ में पिछले महीने सोयाबीन बोई थी। बुआई के बाद लगभग एक महीने तक कम बारिश होने से फसल को थोड़ा नुकसान पहुंचा। लेकिन पिछले एक हμते से जारी बारिश ने इस नुकसान की काफी हद तक भरपाई कर दी है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में सोयाबीन की बुआई अंतिम दौर में है और अगस्त के पहले हμते तक इसकी बुआई पूरी हो जाएगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में सोयाबीन का सामान्य रकबा 112.88 लाख हेक्टेयर है और आमतौर पर मध्य प्रदेश में 55.86 लाख हेक्टेयर में इस तिलहन फसल की खेती होती है। बहरहाल, खेती-किसानी के जानकारों का कहना है कि सोयाबीन के मानक बीजों की कमी और इनकी महंगाई के साथ ही कई किसानों का रुझान अन्य खरीफ फसलों की ओर होने से इस बार मध्य प्रदेश में सोयाबीन के रकबे में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा सकती है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन खरीफ सत्रों के दौरान राज्य में सोयाबीन की फसल को भारी बारिश और कीटों के प्रकोप से काफी नुकसान हुआ था। इस कारण मौजूदा खरीफ सत्र में सोयाबीन के बीजों की कमी उत्पन्न हो गई। केंद्र सरकार ने वर्ष 2021-22 के खरीफ विपणन सत्र के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 3,950 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है। एमएसपी की यह दर पिछले सत्र के मुकाबले 70 रुपए प्रति क्विंटल अधिक है।