वर्ष 2025 से पेट्रोल में 20%एथेनॉल मिलाकर बेचने की योजना

 06 Jun 2021 01:31 AM

नई दिल्ली। सरकार ने अगले चार साल में पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग (सम्मिश्रण) का लक्ष्य रखा है। इससे देश को महंगे तेल आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। इससे पहले सरकार ने 2030 तक इसे हासिल करने का लक्ष्य रखा था, जिसे अब 2025 कर दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, तेल कंपनियां भारतीय मानक ब्यूरो के मानकों के अनुरूप 20% एथेनॉल के मिश्रण वाला पेट्रोल बेचेंगी। यह नियम 1 अप्रैल, 2025 से लागू होगा।

पहले 2030 रखा था लक्ष्य

पिछले साल सरकार ने 2022 तक के लिए पेट्रोल में 10% एथेनॉल ब्लेंडिंग, उसके बाद एथेनॉल मिश्रण की मात्रा को 2030 तक बढ़ाकर 20% करने का लक्ष्य रखा था। इस साल की शुरुआत में इसे 2030 के बजाय 2025 कर दिया गया।

अभी मिलाया जा रहा 8.5 प्रतिशत एथेनॉल

तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम भी शुरू किया गया था। मौजूदा वक्त में पेट्रोल में 8.5% एथेनॉल मिलाया जाता है। एथेनॉल को गन्ने से निकाला जाता है। ऐसे में इससे कच्चे तेल का आयात घटाने और किसानों को अतिरिक्त आय देने में भी मदद मिल सकती है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी मांग के 85% हिस्से के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर है।

2023 तक 10 अरब लीटर इथेनॉल की जरूरत

भारत की योजना 2022 तक 10% एथेनॉल ब्लेंडिंग वाला पेट्रोल बेचने की है। इसके लिए करीब 4 अरब लीटर एथेनॉल की जरूरत होगी। 2023 तक 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल करने के लिए 10 अरब लीटर एथेनॉल की जरूरत होगी। जरूरी सात अरब लीटर एथेनॉल के उत्पादन के लिए चीनी उद्योग को 60 लाख टन अधिशेष चीनी का इस्तेमाल करना होगा, जबकि बाकी एथेनॉल का उत्पादन अतिरिक्त अनाज से किया जाएगा।

क्या होता है एथेनॉल?

एथेनॉल इको-फ्रेंडली यूल है। एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जिसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है। एथेनॉल का उत्पादन वैसे तो गन्ने से होता है। एथेनॉल ब्लेंडिंग वाले पेट्रोल से आम आदमी को भी बड़ा फायदा होगा।

एथेनॉल मिलाने से क्या फायदा है?

पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से पेट्रोल के उपयोग से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। इसके इस्तेमाल से गाड़ियां 35% कम कार्बन मोनोआक्साइड का उत्सर्जन करती है। सल्फर डाइआक्साइड और हाइड्रोकार्बन का उत्सर्जन भी इथेनॉल कम करता है। इथेनॉल में मौजूद 35 फीसदी आक्सीजन के चलते ये यूल नाइट्रोजन आक्साइड के उत्सर्जन को भी कम करता है।

आम आदमी को क्या फायदा होगा?

एथेनॉल मिलावट वाले पेट्रोल से चलने वाली गाड़ी पेट्रोल के मुकाबले बहुत कम गर्म होती हैं। एथेनॉल में अल्कोहल जल्दी उड़ जाता है, जिसके चलते इंजन जल्द गर्म नहीं होता है। इसके अलावा ये कच्चे तेल के मुकाबले काफी सस्ता पड़ेगा। इससे भी महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद है।

चीनी मिलों को कमाई का नया जरिया मिलेगा

एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी। क्योंकि एथेनॉल गन्ने, मक्का और कई दूसरी फसलों से बनाया जाता है। चीनी मिलों को कमाई का एक नया जरिया मिलेगा और कमाई बढ़ेगी।