नई पीढ़ी के नेटवर्क्स में निजता और सुरक्षा होगी गंभीर चुनौती

 22 Apr 2021 01:46 AM

नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया की सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के चुनिंदा संगठनों ने डाटा और निजता के अधिकार की सुरक्षा तथा कृत्रिम मेधा (एआई) जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकी के मानकीकरण के क्षेत्र में सहयोग की एक परियोजना का पहला चरण पूरा कर लिया है। इसमें अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीकों (5जी/6जी), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), क्वांटम कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन जैसी महत्वपूर्ण और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के तकनीकी मानकों के विकास का काम शामिल है। इस परियोजना में शामिल दूरसंचार सेवा कंपनी रिलायंस जियो के अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। इसमें रिलायंस जियो, आईआईटी मद्रास तथा सिडनी विश्वविद्यालय जैसे संगठन शामिल हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज की दूरसंचार इकाई रिलायंस जियो इन्फोकॉम के अधिकारियों ने कहा, रिलायंस जियो, आईआईटी मद्रास, सिडनी विश्वविद्यालय और न्यू साउथ वेल्स विश्विद्यालय मिलकर अगली पीढ़ी के दूरसंचार नेटवर्क में निजता और सुरक्षा चुनौतियों के समाधान पर काम कर रहे हैं। वायरलेस नेटवर्क के उपयोग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स सिस्टम में जोरदार तेजी आने की उम्मीद है। ऐसे में 5जी और 6जी नेटवर्कों की क्षमता में तीव्र बढ़ोतरी होगी, साथ ही नई पीढ़ी के नेटवर्कों को निजता और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री मारिज पायने ने ऑस्ट्रेलिया-भारत साइबर और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी भागीदारी (एअईसीसीटीपी) के पहले चरण की सफलता की बुधवार को घोषणा की। अधिकारियों के अनुसार वायरलेस नेटवर्क की प्राइवेसी और सुरक्षा के खतरों पर जल्दी ही एक श्वेत पत्र जारी किया जाएगा। इसके बाद नियामकों, नीति निमार्ताओं और शोधकतार्ओं के साथ बेंगलुरु में कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें उपभोक्ताओं के आंकड़ों और सूचना (डाटा) की सुरक्षा के विषय पर चर्चा की जाएगी।

ऑस्ट्रेलिया-भारत करेंगे साइबर क्षेत्र में भागीदारी

इसके लिए प्रो. जोसेफ डेविस के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई है जिसमें रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के डॉ. दिलीप कृष्णस्वामी, सिडनी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अल्बर्ट जोमाया, न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय के प्रो. अरुणा सेनेविरत्ने और डॉ दीपक मिश्रा, ऑर्बिट ऑस्ट्रेलिया के जैकब मलाना, आईआईटी मद्रास के डॉ अयोन चक्रवर्ती और कॉलिगो टेक्नोलॉजीज के श्रीगणेश राव शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया-भारत साइबर और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी भागीदारी के तहत दो और शोध कार्यक्रमों को भी अनुदान दिया गया है। क्वांटम टेक्नोलॉजी के लिए रूपरेखा तैयार करने का काम सिडनी विश्वविद्यालय और भारत के ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन को सौंपा गया है। साथ ही वैश्विक कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी आपूर्ति शृंखला के लिये रूपरेखा तैयार करने का काम ला-ट्रोब विश्वविद्यालय और आईआईटी कानपुर को दिया गया है।