अप्रैल में थोक मुद्रास्फीति 10.49 प्रतिशत की रिकॉर्ड ऊंचाई पर

 18 May 2021 01:45 AM

नई दिल्ली। खाने -पीने का सामान, कच्चा तेल और विनिर्मित वस्तुओं के दाम बढ़ने से अप्रैल में थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति 10.49 प्रतिशत के अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि थोक मुद्रास्फीति के मामले में यह रुख आगे भी बना रह सकता है। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति में यह लगातार चौथा महीना है जब बढ़त दर्ज की गई हे। इससे पिछले महीने मार्च में यह 7.39 प्रतिशत रही थी। अप्रैल,2020 में थोक मुद्रास्फीति शून्य से 1.57 प्रतिशत नीचे थी। अप्रैल 2020 में देश में संपूर्ण लॉकडाउन लगा था, जिससे मुद्रास्फीति में गिरावट आ गई थी। तुलनात्मक आधार के प्राभाव की वजस से इस समय थोक महंगाई की दर कुछ अिधक ऊंची दिख रही है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा, मुख्य रूप से कच्चे तेल, पेट्रोल और डीजल जैसे खनिज तेलों और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते अप्रैल 2021 में मुद्रास्फीति की वार्षिक दर पिछले साल के इसी महीने की तुलना में अधिक रही है। इस दौरान अंडा, मांस और मछली जैसी प्रोटीन युक्त खाद्य उत्पादों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के चलते खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 4.92 प्रतिशत हो गई। समूह में अंडा, मांस और मछली समूह की महंगाई दर 10.88 प्रतिशत और दालों में 10.74 प्रतिशत और फलों के दाम में 27.43 प्रतिशत की वृद्धि का प्रमुख योगदान रहा। मार्च 2021 में इस समूह में 3.24 प्रतिशत की वृद्धि रही थी। हालांकि, सब्जियों की यदि बात की जाये तो इस समूह में दाम 9.03 प्रतिशत घटे हैं। इससे पिछले महीने इनके दाम में 5.19 प्रतिशत की गिरावट आई थी। इसी तरह ईंधन और बिजली समूह की मुद्रास्फीति अप्रैल में 20.94 प्रतिशत रही, जबकि विनिर्मित उत्पादों में यह 9.01 प्रतिशत रही। इक्रा की प्रमुख अथर्शास्त्री आदिति नायर ने कहा कि खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 4.9 प्रतिशत पर पहुंचाना छह माह के उच्चस्तर को दर्शाता है।