64 साल के रिटायर्ड अधिकारी ने कै्रक किया नीट

 27 Dec 2020 11:14 AM

भुवनेश्वर। ओडिशा के बरगढ़ के अताबीरा के 64 वर्षीय रिटायर्ड बैंक अधिकारी जय किशोर प्रधान ने पूरी जिंदगी नौकरी करते हुए निकाली। एसबीआई में डिप्टी मैनेजर पद से रिटायर हुए प्रधान ने इस साल सितंबर में मेडिकल एंट्रेंस के एग्जाम नीट की परीक्षा पास करके एमबीबीएस प्रथम वर्ष में दाखिला लिया है। प्रधान ने नीट परीक्षा पास करने के बाद एमबीबीएस कोर्स के लिए दिव्यांगता आरक्षण श्रेणी में ओडिशा के बुर्ला स्थित सरकारी वीर सुरेन्द्र साईं इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च में दाखिला लिया है। वीआईएमएसएआर के निदेशक प्रोफेसर ललित मेहर का कहना है कि यह देश के स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में दुर्लभ मौका है और प्रधान ने इस उम्र में मेडिकल स्टूडेंट के रूप में प्रवेश लेकर एक उदाहरण पेश किया है।

सपने को पूरा करने के लिए उम्र कोई बंधन नहीं होती

प्रधान ने कहा, मैंने 12वीं के बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षा में आवेदन किया था, लेकिन े क्रैक करने में असफल रहा। इसके बाद े फिजिक्स में बीएससी की और एक स्कूल में टीचर के रूप में नियुक्ति हुई। एक साल बाद मैंने इंडियन बैंक ज्वाइन किया और फिर 1983 में स्टेट बैंक आॅफ इंडिया में नौकरी मिली। सपने को पूरी करने की कोई उम्र नहीं होती इसलिए 2016 में बैंक से रिटायरमेंट के बाद मैंने नीट की तैयारी शुरू कर दी।

पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण नहीं छोड़ी

3नौकरी प्रधान ने कहा, मैंने नौकरी छोड़कर एमबीबीएस में दाखिला लेने की योजना बनाई थी लेकिन हम पांच भाई हैं और जिम्मेदारियों के चलते नौकरी नहीं छोड़ सका। जुड़वां बेटियों और एक बेटे के पिता, प्रधान ने परीक्षा में एक और शॉट तब लेना चाहा जब उनकी बेटी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी। प्रधान ने कहा कि जब मैं उसकी तैयारी में मदद कर रहा था तब मुझे लगा की क्यों ना मैं भी एक्जाम दे लूं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला बना परीक्षा देने में मददगार

प्रधान शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं इसलिए उन्होंने विकलांग कोटे के तहत एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया है। हालांकि, नीट परीक्षा के लिए ऊपरी आयु सीमा 25 वर्ष है। उन्होंने आगे बताया कि 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने अपनै फैसले में 25 साल से ऊपर की उम्र के लोगों को भी नीट में शामिल होने की अनुमति दे दी थी जिसके बाद वीर सुरेन्द्र साईं इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (विमसार) में उन्हें दाखिला लेने में मदद मिली।