नई दिल्ली: अनुच्छेद 370 और 35A समाप्त होने के बाद पीएम की जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों को साथ पहली बैठक आज, पढ़ें इन आर्टिकल के बारे में

 24 Jun 2021 12:19 PM

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद-35A  को समाप्त करने के बाद यह पहला मौका है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली में जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों के साथ बातचीत करेंगे। आज हो रही इस बैठक में जम्मू-कश्मीर के 4 पूर्व सीएम व 4 पूर्व डिप्टी सीएम सहित 14 नेता भाग लेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा बैठक में मौजूद रहेंगे। इस बैठक को लेकर जम्मू-कश्मरी में सियासी हलचल तेज है। स्कूल-कॉलेजों से लेकर उच्च गति की इंटरनेट सेवाएं तक बंद कर दी गई हैं। कई जगहों पर धारा-144 लागू कर दी गई है। ऐसे में आइए जानते हैं क्या है अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद-35A , इनके हटने के बाद क्या बदलाव आया है।

 

1952 से लागू थे प्रावधान

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 और 35ए के प्रावधान 17 नवंबर, 1952 से लागू थे। ये अनुच्छेद जम्मू-कश्मीर और यहां के नागरिकों को कुछ अधिकार और सुविधाएं देते थे, जो देश के अन्य हिस्सों से अलग हैं। जब सरकार अनुच्छेद-370 के अधिकांश प्रावधानों को निरस्त कर दिया और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया तो वहां की राजनीतिक तस्वीर ही बदल गई। साथ ही साथ यहां के नागरिकों को मिलने वाले कुछ विशेष अधिकारों और सुविधाओं में भी कटौती हुई।

  • पहले जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती थी। इस राज्य का अपना झंडा भी था। अनुच्छेद-370 के प्रावधान हटने से ये चीजें खत्म हो गईं।
  • पहले जम्मू-कश्मीर में भारत के राष्ट्रीय ध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं माना जाता था। लेकिन 370 हटने से देश के अन्य हिस्सों की तरह यहां भी ये गतिविधियां अपराध की श्रेणी में आ गईं।
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश पहले जम्मू-कश्मीर में मान्य नहीं होते थे। अब वहां के नागरिकों को भी शीर्ष अदालत के आदेश मानने पड़ते हैं।
  • पहले रक्षा, विदेश, संचार को छोड़कर अन्य मामलों में जम्मू-कश्मीर विधानसभा की सहमति लेनी पड़ती थी, अब वहां केंद्र सरकार अपने कानून लागू कर सकती है।
  • पहले जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल छह साल का होता था। अब अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटने से वहां भी अन्य सभी राज्यों की तरह विधानसभा का कार्यकाल पांच वर्षों का होगा।
  • हालांकि, अभी वहां विधानसभा नहीं है। अनुच्छेद-370 के प्रावधान निरस्त करने के साथ जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया था।
  • जम्मू-कश्मीर दिल्ली और पुड्डुचेरी की तरह ही विधानसभा युक्त केंद्र शासित प्रदेश है। जबकि लद्दाख चंडीगढ़ की तरह बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश है।
  • पहले कश्मीर में हिंदू-सिख अल्पसंख्यकों को 16 फीसदी आरक्षण नहीं मिलता था। अब अनुच्छेद-370 के प्रावधान निरस्त होने से वहां भी अल्पसंख्यकों को आरक्षण का लाभ मिल पा रहा है।

अनुच्छेद-35A के जरिए जम्मू-कश्मीर के स्थायी नागरिकता के नियम और नागरिकों के अधिकार तय होते थे। 

  • इस प्रावधान के अनुसार, 14 मई, 1954 या इससे पहले 10 सालों से राज्य में रहने वालों और वहां संपत्ति हासिल करने वालों को ही जम्मू-कश्मीर का स्थायी नागरिक बताया गया था। इन निवासियों को विशेष अधिकार प्राप्त होते थे।
  • स्थायी निवासियों को ही राज्य में जमीन खरीदने, सरकारी नौकरी पाने, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के अधिकार मिले हुए थे। बाहरी / अन्य लोगों को यहां जमीन खरीदने, सरकारी नौकरी पाने, संस्थानों में दाखिला लेने का अधिकार नहीं था।
  • अगर जम्मू-कश्मीर की कोई महिला भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर लेती थी, तो उसके अपनी पैतृक संपत्ति पर से अधिकार छिन जाते थे। लेकिन पुरुषों के मामले में ऐसा नहीं था।

 

अनुच्छेद-35ए हटाए जाने से ये नियम बदल गए 

  • अब देश का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर राज्य में जमीन खरीद पा रहे हैं। वे वहां सरकारी नौकरी भी कर सकते हैं।
  • देश के किसी भी राज्य के विद्यार्थी वहां उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिला ले सकते हैं।
  • जम्मू-कश्मीर में महिला और पुरुषों के बीच अधिकारों को लेकर भेदभाव खत्म हो गया है।
  • अब देश का कोई भी व्यक्ति कश्मीर में जाकर बस सकता है।

 

पीएम संग बैठक में ये नेता होंगे शामिल

पीएम मोदी संग बैठक में पूर्व सीएम डॉ. फारूक अब्दुल्ला, गुलाम नबी आजाद, महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला, पूर्व उपमुख्यमंत्री ताराचंद, मुजफ्फर हुसैन बेग, डॉ. निर्मल सिंह और कवींद्र गुप्ता मौजूद रहेंगे। 'जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी' के चेयरमैन सैयद अल्ताफ बुखारी, प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख जीए मीर, पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद गनी लोन, पैंथर्स पार्टी के प्रो. भीम सिंह और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (माकपा) के नेता मोहम्मद युसुफ तारीगामी ने बैठक में शामिल होने के लिए अपनी सहमति दी है। शुरुआत में गुपकार नेताओं को पीएम की बैठक में बुलाने का विरोध करने वाले भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र रैना भी मौजूद रहेंगे।

 

कश्मीरी नेता इन मुद्दों पर कर सकते हैं चर्चा

बैठक के एजेंडे पर गुपकार ने खुलकर भले ही कुछ न कहा हो, लेकिन उनकी मांग रहेगी कि अनुच्छेद 370 को दोबारा से बहाल किया जाए। दूसरा, परीसीमन प्रक्रिया में सभी राजनीतिक पार्टियों के सुझावों पर अमल हो। तीसरा, जम्मू-कश्मीर को पहले की तरह पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। विकास के मौजूदा पैटर्न में कुछ बदलाव किए जाएं, जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों के अलावा निजी क्षेत्र में अवसर बढ़ाए जाएं। जम्मू-कश्मीर के विभाजन जैसे किसी प्रस्ताव का विरोध किया जाएगा।