ग्रीन जेनरेटर: आईआईटी दिल्ली ने बनाया हाड्रोजन से चलने वाला जेनरेटर, बहुत कम प्रदूषण करेगा

 06 Jun 2021 01:17 PM

नई दिल्ली। देश के साथ ही दुनियाभर में प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन गया है। ज्यादातर देश पेट्रोल-डीजल पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहते हैं। भारत भी इसी प्रयास में लगा है। इसी बीच आईआईटी दिल्ली ने ऐसा जेनरेटर बनाया है जो डीजल के बजाय हाइड्रोजन से चलता है। रिसर्चर ने इसे ग्रीन जेनरेटर नाम दिया है। उन्होंने दावा किया है कि स्पार्क-इग्निशन इंजन तकनीक वाला यह जेनरेटर बहुत कम प्रदूषण करेगा। जेनरेटर को विकसित करने के बाद आईआईटी ने पेटेंट के लिए आवेदन किया है। आईआईटी ने इस जेनरेटर को  इंडियन ऑयल अनुसंधान एवं विकास केंद्र और किर्लोस्कर आयल इंजन लिमिटेड के सहयोग से डेवलप किया है। इसके लिए अलग से ल्यूब्रिकेंटर को भी बनाया गया है। आइआइटी ने दावा किया कि बिना कार्बन उत्सर्जन के  बिजली को उत्पादित करने में जेनरेटर सफल रहेगा। 


डीजल जेनरेटर से निकलते हैं विषैले तत्व
संस्थान के अनुसार, डीजल से चलने वाले जेनरेटर से काफी विषैले तत्व निकलते हैं, जिससे वातावरण में प्रदूषण फैलता है। यह न सिर्फ वातावरण को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं बल्कि मनुष्य के स्वास्थ्य पर भी इनका बुरा प्रभाव पड़ता है। डीजल जेनरेटर से  हाइड्रोकॉर्बन, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, धुंआ, कार्बन डाइऑक्साइड व पार्टिकुलेट मैटर आदि  का उत्सर्जन होता है। यह हवा में घुलकर हमारे शरीर के भीतर प्रवेश कर विभिन्न बीमारियों को जन्म देते हैं।


हाइड्रोजन में कार्बन नहीं होता 
सेंटर फार एनर्जी स्टडीज के प्रो. डॉ. के ए सुब्रमण्यम ने बताया कि- हाइड्रोजन में कार्बन नहीं होता है। यही वजह है कि हाइड्रोजन ईंधन से कार्बन का उत्सर्जन नहीं होता। उन्होंने कहा कि विभिन्न तकनीक के माध्यम से नाइट्रोजन के आक्साइड के उत्सर्जन को कम किया जा सकता है। उन्होने बताया कि हाइड्रोजन विशेषतौर पर मूर्त उत्पाद के रूप में अमोनिया, रिफाइनरी जैसी फैक्ट्रियों में उपलब्ध है। इसके अलावा इलेक्ट्रोलाइजर का प्रयोग कर पानी का रासायनिक विभाजन कर हाइड्रोजन को निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि बिजली को इलेक्ट्रोलाइजर की मदद से हाइड्रोजन में परिवर्तित किया जा सकता है। यदि बिजली की मांग बढ़ती है तो आइआइटी के जेनरेटर से हाइड्रोजन का उपयोग कर बिजली उत्पादन किया जा सकेगा।