राष्ट्रीय युवा दिवस आज: स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर पढ़ें इस दिन के इतिहास और महत्व के बारे में

 12 Jan 2021 09:28 AM

आज यानी 12 जनवरी को महान दार्शनिक, आध्यात्मिक और सामाजिक नेताओं में से एक स्वामी विवेकानंद की जयंती है। इस दिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। हमारा देश युवाओं का देश है। यह एक अवसर है उस महान आत्मा को याद करने का जिसने समूचे विश्व में देश का नाम रोशन किया। दुनिया का भारतीय संस्कृति और सनातन जीवन पद्धति से परिचय कराया। यहां पढ़ें राष्ट्रीय युवा दिवस का महत्व और इतिहास... 

स्वामी विवेकानंद का जीवन 
1863 में कोलकाता में जन्म हुआ, बचपन में नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। आगे चलकर यह बालक भारतीय संस्कृति का ध्वजवाहक बना और स्वामी विवेकानंद के नाम से जाना गया।  
1893 में स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपने संक्षिप्त किंतु प्रभावी वक्तव्य में पश्चिमी दुनिया का भारतीय वेदांत दर्शन से परिचय कराया। उन्हें भारतीय संस्कृति और सनातन जीवन पद्धति से अवगत कराया। इस क्षण को ईस्ट मीट वेस्ट के तौर पर जाना जाता है। 
1897 में स्वामी विवेकानंद ने धर्म संसद से लौटने के बाद अपने गुरु संत श्रीरामकृष्ण परमहंस के नाम पर सामाजिक सेवाओं के लिए रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। इसके आदर्श कर्म योग और गुरु श्रीरामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं पर आधारित हैं।
1902 में 04 फरवरी के दिन स्वामी विवेकानंद अपने कमरे में गए और ध्यान लगाकर बैठ गए। इसी ध्यानावस्था में वह इस दुनिया से परलोक प्रस्थान कर गए। 
1984 में भारत सरकार ने अपने महान आध्यात्मिक और दार्शनिक नेता का सम्मान करने और देश के युवाओं को उनके विचारों से प्रोत्साहित करने के लिए स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन, 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में घोषित किया था।

योग वेदांत संस्कृति को पुनर्जीवित किया 
देश में स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और विचारों को सम्मान देने के लिए हर साल राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में युवाओं के महत्व के बारे में बहुत मुखर थे। विवेकानंद ने विदेशों में जो हासिल किया उसने भारत की आध्यात्मिकता छवि और योग वेदांत संस्कृति को पुनर्जीवित करने में एक प्रमुख भूमिका निभाई है। 

शिकागो में विश्व धर्म संसद से मिली ख्याति 
1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद में उन्होंने जो भाषण दिया, वह अमेरिका की बहनों और भाइयों के साथ शुरू हुआ, जिसने उन्हें विश्व स्तर पर अलौकिक और तेजस्वी वक्ता एवं दार्शनिक के तौर पर पहचान दिलाई। उनके दिए गए उपदेश और बताए गए आदर्शों आज भी अमर हैं। स्वामी विवेकानंद ने हमेशा युवाओं की क्षमता का दोहन करने पर ध्यान केंद्रित किया। वह युवा पीढ़ी को प्रेरित करना चाहते थे ताकि वे अंग्रेजों का मुकाबला कर सकें और स्वतंत्रता प्राप्त कर सकें। 

इंद्रियों पर संयम   
विवेकानंद को दर्शन, धर्म, साहित्य, वेद, पुराण, उपनिषद विलक्षण समझ थी। विवेकानंद का कहना था कि पढ़ने के लिए एकाग्रता जरूरी है और एकाग्र होने के लिए ध्यान जरूरी है। ध्यान से ही हम अपनी इंद्रियों पर संयम रखकर एकाग्रता प्राप्त कर सकते हैं।