बर्थडे स्पेशल: फिल्मों से लेकर न्यूजरीडर तक, ऐसी थी स्मिता पाटिल

 17 Oct 2020 10:42 AM  140

यह कहानी है एक ऐसी एक्ट्रेस कि जिसने पूरी शिद्धत से मेनस्ट्रीम सिनेमा में अपनी जगह बनाई. यह कहानी है एक ऐसी एक्ट्रेस कि जिसने फिल्मों में आने से पहले  दूरदर्शन पर बतौर न्यूजरीडर काम किया. यह कहानी है एक ऐसी एक्ट्रेस कि जिसने मात्र 31 साल के अपने जीवन में 3 नेशनल अवॉर्ड जीते. यह कहानी है स्मिता पाटिल की. 

दरअसल, इस नाम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है. जन्म के समय उनके चेहरे पर मुस्कराहट देख कर उनकी माँ विद्या ताई पाटिल ने उनका नाम स्मिता रख दिया था. 

राजनितिक परिवार से तालुक्क रखने वाली स्मिता का जन्म 17 अक्टूबर, 1955 को पुणे में हुआ था. उनकी माता एक समाज सेविका थीं और उनके पिता एक पॉलिटीशियन. फिल्मों में आने से स्मिता दूरदर्शन पर मराठी में समाचार पढ़ा करती थीं. 

आंखों में गहराई, चेहरे पर गजब सा ठहराव स्मिता को स्मिता बनाता था. स्क्रीन पर उनका यह रंग देखने लायक हुआ करता था वहीं दूसरी ओर पर्दे के पीछे असल ज़िंदगी में वो बहुत शरारती थीं. 

उनका रंग सांवला था और कद भी थोड़ा  छोटा था. भारतीय सिनेमा में उस वक्त लुक्स पर काफी ध्यान दिया जाता था. ऐसे में स्मिता के लिए अपने अभिनय के दम पर एक बड़ा मुकाम हासिल करना आसान नहीं था. लेकिन उन्होंने अपने करियर में जो भी रोल प्ले किए उनके साथ पूरा इंसाफ किया. 

स्मिता FTII पास आउट भी थीं. उन्होंने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत 1974 में आई ब्लैक एंड वहाइट फिल्म 'मेरे साथ चल' से कि थी. 

इस फिल्म में काम करने के बाद फिर कभी स्मिता ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. वे लगातार सक्सेस कि सीढ़िया चढ़ती गई. एक के बाद एक फिल्में करती गईं. फिर चाहें वो पैरेलल सिनेमा हो या मेनस्ट्रीम सिनेमा, उन्होंने कई सारे रोल प्ले किए. और सभी अच्छी बात यह थी कि उन्हें इन सभी रोल्स में पसंद भी किया जा रहा था. इसमें आप निशांत, मंथन, भूमिका, द नेक्सेलाइट्स, , अर्ध सत्या, मंडी, शराबी, अनोखा रिश्ता,एलबर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है, चक्र, नमक हलाल, बाजार, शक्ति, अर्थ  मिर्च मसाला और वारिस जैसी फिल्मों के नाम जोड़ सकते हैं. 

स्मिता कि शादी एक्टर और पॉलिटिशियन राज बब्बर से हुई थी. फिल्मों के साथ ही स्मिता राज बब्बर से अपने सम्बन्धों की वजह से भी चर्चा में रही. उनके बारे में लोगों ने कहा कि उन्होंने राज बब्बर और नादिरा बब्बर की शादी तुड़वा दी. इसी बीच स्मिता कि शादी राज बब्बर से हुई और उनका एक बेटा हुआ. स्मिता पाटिल कि बायोग्राफी लिखने वाली पत्रकार और लेखक मैथली राओ अपनी किताब Smita Patil: A Brief Incandescence में बताती हैं की इस दौरान स्मिता अकेले पन से गुजर रहीं थी. यहां तक कि अपनी प्रेग्नेंसी के दौरान खुद ड्राइव कर कर मेडिकल चेक अप के लिए जाया करती थी. प्रतीक के जन्म के कुछ दिनों बाद 13 दिसंबर 1986 को स्मिता का निधन हो गया.

स्क्रीन राइटर श्याम बेनेगल बताते हैं कि उनकी मृत्यु मेडिकल कॉम्प्लीकेशन्स के कारण हुई थी. एक्ट्रेस के अचानक चले जाने से किसी के लिए भी ये यकीन कर पाना मुश्किल न था कि 31 साल की उम्र में ही उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. स्मिता इतनी उम्दा कलाकार थी कि उनके निधन के बाद भी उनकी एक दर्जन फिल्में रिलीज हुईं. इतने छोटे करियर में ही उन्होंने 3 नेशनल अवॉर्ड जीते. उन्हें 2 फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिले. भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी नवाजा.