भारत माला प्रोजेक्ट में शामिल होने पर मिलेगी निर्माण के लिए राशि, भोपाल बनाएगा डीपीआर

 11 Jun 2021 08:50 PM

ग्वालियर। चंबल के बियाबान बीहड़ में चिराग जलाने के लिए भारत सरकार ने दिसंबर 2020 में अटल प्रोग्रेस वे के निर्माण की घोषणा की थी। भिंड , मुरैना और श्योपुर के अलावा राजस्थान के कोटा तथा इटावा जिले को जोड़ने वाले इस प्रोग्रेस वे के निर्माण पर करीब 7532 करोड़ रुपए खर्च होंगे। चूंकि इस प्रोजेक्ट को भारत माला प्रोजेक्ट में शामिल किया जाना था, लेकिन अभी तक अटल प्रोग्रेस वे को भारत माला में शामिल नहीं किया जा सका है। अटल प्रोग्रेस वे के तहत सिक्स लेन बनाया जाना प्रस्तावित है। इसके तहत भिंड, मुरैना और श्योपुर के 360 किलोमीटर के अलावा राजस्थान की सीमा में 78 किलोमीटर तथा यूपी सीमा में इटावा जोड़ने वाले 18 किलोमीटर का दायरा भी स्पर्श करेगा। इस सिक्सलेन की चौड़ाई 100 मीटर लंबी होगी।

मालवीय कंसलटेंट बना रहा है डीपीआर :

प्रोजेक्ट की डीपीआर भोपाल की मालवीय कंसलटेंट कंपनी द्वारा बनाई जा रही है। कंसलटेंट कंपनी को जल्द से जल्द डीपीआर बनाने के लिए कहा है। डीपीआर में ही निजी जमीन अधिग्रहीत करने और किसानों को जमीन की राशि का पैसा देने के लिए राशि का उल्लेख किया जाएगा। इसके बाद ही 1250 वर्गकिलोमीटर जमीन अधिग्रहीत हो सकेगी। फॉरेस्ट से प्रोजेक्ट के लिए 284 वर्ग किलोमीटर जमीन चाहिए। यह फाइल भी दिल्ली में अटकी हुई है।
 

चंबल नदी के समानांतर बनेगा प्रोजेक्ट : 

यह प्रोजेक्ट चंबल नदी के समानांतर बनेगा। यूपी की सीमा में यह प्रोजेक्ट बढ़पुरा (इटावा) को भी टच करेगा। प्रोजेक्ट की खासियत है कि प्रोग्रेस वे के समानांतर लॉजिस्टिक पार्क, औद्योगिक पार्क, हाईवेट्रीट निर्मित किए जाएंगे।अटल प्रोग्रेस वे जितनी जल्दी भारत माला प्रोजेक्ट में शामिल हो जाएगा हमारा काम शुरू हो जाएगा। क्योंकि प्रोजेक्ट की 7,532 करोड़ रुपए तभी एनएचएआई को मिल पाएंगे। डीपीआर के लिए टेंडर हो चुके हैं। भोपाल की कंसलटेंट कंपनी को यह काम सौंपा गया है। 
-आरके गुप्ता, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, अटल प्रोग्रेस-वे