23 साल पुरानी अदावत भूल पवैया के घर जाकर मिले सिंधिया; कांग्रेस ने कहा- अस्तित्व बचाने भटक रहे

 12 Jun 2021 04:54 PM

ग्वालियर। राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा में आने के बाद अपनी इमेज बदल ली है। वे खुद को एक सर्वमान्य नेता के रूप में स्थापित करने में लगे हैं। छोटे से लेकर बड़े नेताओं तक के वह घर जा रहे हैं। ग्वालियर में वे पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया के घर जाकर मिले। पवैया और सिंधिया परिवार की 23 साल से अदावत चल रही थी। सिंधिया आज खुद पवैया के घर पहुंचे और उनके पिता के निधन पर शोक जताया। साथ ही कहा है कि अब नए रिश्ते की शुरुआत हो रही है।

इधर, इस मुलाकात पर कांग्रेस ने तंज कसा है। पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ने कहा कि हमें तो इस बात का बड़ा दुख है- कांग्रेस में सिंधिया नेता थे, लोकसभा में उपनेता रहे और आज अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। इसका मुझे बड़ा दुख है, कम से कम उन्हें इस तरह दर-दर नहीं भटकना चाहिए। सिंधिया के खिलाफ पवैया हमेशा मुखर रहे हैं। उनके विरोध में रहे हैं। पवैया के साथ प्रभात झा भी सिंधिया के विरोधी रहे, लेकिन सिंधिया अब बिना बुलाए उनके घर जा रहे हैं, तो कहीं न कहीं कोई स्वार्थ तो होगा ही।

दरअसल, मध्य प्रदेश की राजनीति इस बात की गवाह रही है कि जयभान सिंह पवैया और ज्योतिरादित्य सिंधिया कभी एक-दूसरे के घर नहीं गए हैं। आज पहली बार ज्योतिरादित्य सिंधिया, जयभान सिंह पवैया के निवास पर पहुंचे। बीते 20 अप्रैल को जयभान सिंह पवैया के पिता का निधन हो गया था। सिंधिया सांत्वना देने उनके घर पहुंचे थे। मगर यह मुलाकात अब मध्य प्रदेश की सियासत में बड़ी चर्चा बनी हुई है।

दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में करीब 20-25 मिनट तक बात हुई है। मुलाकात के बाद बाहर निकले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बड़ा बयान दिया है। सिंधिया ने कहा कि जयभान सिंह पवैया जी से नया संबंध, नया रिश्ता कायम करने की कोशिश की है, अतीत-अतीत होता है, वर्तमान-वर्तमान होता है। हम दोनों भविष्य में आगे काम करेंगे।

पवैया और सिंधिया परिवार के बीच सियासी अदावत पिछले 23 साल से चली आ रही है। सन् 1998 में जयभान सिंह पवैया ने तत्कालीन कांग्रेस नेता और ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया के खिलाफ ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में सिंधिया और पवैया के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था। माधवराव सिंधिया महज 28 हजार वोट से चुनाव जीते थे। माधवराव सिंधिया ने इस बेहद मामूली जीत के बाद नाराज होकर आगे ग्वालियर से चुनाव नहीं लड़ा। उसके बाद माधवराव सिंधिया गुना चले गए।

ज्योतिरादित्य को कड़ी टक्कर दी थी
माधवराव के बाद पवैया और ज्योतिरादित्य के बीच भी यह सियासी अदावत जारी रही है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में गुना लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार ज्योतिरादित्य के खिलाफ जयभान सिंह पवैया ने बीजेपी से चुनाव लड़ा। यहां भी कांटे का मुकाबला हुआ। चार लाख से जीतने वाले सिंधिया की जीत एक लाख बीस हजार पर सिमट गई थी।

राजमाता के करीबी रहे पवैया
पवैया की सियासी अदावत भले ही माधवराव ओर ज्योतिरादित्य सिंधिया से रही हो, लेकिन पवैया राजमाता विजयाराजे सिंधिया के करीब रहे हैं। पवैया जनसंघ से लेकर बीजेपी तक में राजमात से जुड़े रहे हैं। बजरंगदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहने के दौरान बाबरी आंदोलन में अगुआ रहे है। हालांकि, यशोधरा राजे सिंधिया और पवैया दोनों के बीच भी सियासी रिश्ते सामान्य रहे हैं।