REMDESIVIR NEWS : एम्स ने कोरोना मरीजों के इलाज के प्रोटोकॉल से हटाया रेमडेसिविर, अब कम गंभीर मरीजों को नहीं लगेगा रेमडेसिविर, WHO ने दो दिन पहले हटाया

 23 Apr 2021 01:51 PM

नई दिल्ली। प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। कोरोना के पीड़ित मरीजों के जीवन रक्षक के रूप में चर्चा बटोर चुका यह इंजेक्शन अब कम गंभीर मरीजों को नहीं लगाया जाएगा, क्योंकि कोरोना संक्रमितों के लिए इलाज के लिए रेमडेसिविर को रामबाण दवा ही मान लिया गया था। इसके बाद एम्स ने इन दावों को लगभग नकारते हुए अपने प्रोटोकॉल से इस दवा को हटा दिया है। एम्स ने गुरूवार को कोरोना संक्रमितों के इलाज के अपने प्रोटोकॉल में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए प्रोटोकॉल के तहत कम गंभीर बीमारियों वाले कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में रेमडेसिविर दवा प्रयोग नहीं की जाएगी।

 

जानिए क्या है नया प्रोटोकॉल
नए प्रोटोकॉल के तहत कम गंभीर बीमारियों वाले कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में रेमडेसिविर दवा प्रयोग नहीं की जाएगी। वहीं, हल्के रोगों वाले कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में इनहेलेशनल बुडेसोनाइड का इस्तेमाल किया जाएगा। एम्स नई दिल्ली ने साधरण कोरोना के संक्रमण मे आइवरमेक्टिन (Ivermectin) टैबलेट के साथ साथ सांस द्वारा लिये जाने वाले स्टेरॉयड मेडिसिन को उपयुक्त बताया है और गंभीर प्रकृति के संक्रमण मे भी Remdesivir Toclizumab एवं प्लाज्मा थेरेपी को रिजर्व रखा हैं, तथा इसे मरीजो की गंभीरता को देखते हुए उपयोग करने को कहा गया हैं।

 

कोरोना के मरीजों की बनाई तीन केटेगरी 
एम्स प्रशासन ने बताया कि प्रोटोकॉल के तहत कोरोना संक्रमितों की तीन श्रेणियां बनाई है। हल्के रोगों वाले, कम गंभीर रोगों वाले व गंभीर रोगों वाले कोरोना संक्रमित मरीज। प्रोटोकॉल के तहत हल्के रोगों वाले कोरोना संक्रमितों का होम आइसोलेशन में इलाज चलेगा। यदि इन मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होगी या पांच दिन से अधिक बुखार आएगा या ऑक्सीजन संतृप्ति में बदलाव होता है तो तत्काल चिकित्सकीय सुविधा प्रदान की जाएगी।

 

इमरजेंसी में डॉक्टर्स कर सकते हैं इसका उपयोग
एम्स के पुराने प्रोटोकॉल में एंटीवायरल थैरपी के तहत ऐसे मरीजों के इलाज के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन का प्रयोग किया जाता था। हालांकि, नए प्रोटोकॉल में इसे हटा दिया गया है। प्रोटोकॉल के मुताबिक, गंभीर रोगों वाले कोरोना संक्रमण वाले ऐसे मरीज जिनका आॅक्सीजन लेवल 90 से कम और सांस लेने की गति प्रति मिनट 30 के ऊपर होगी उन्हें आइसीयू में भर्ती किया जाएगा। एम्स ने अपने नए प्रोटोकॉल में कहा है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन का उपयोग मरीज की हालत के अनुसार किया जाएगा। डॉक्टर इमरजेंसी हालत में इसका उपयोग कर सकते हैं।

 

एंटीवायरल थैरपी के तहत ही प्रयोग को मंजूरी
इन मरीजों के इलाज में आइवरमेक्टिन के साथ पहली बार प्रोटोकॉल में बुडेसोनाइड इनहेलर के प्रयोग की बात कही गई है। पांच दिन से अधिक बुखार या खांसी होने पर चिकित्सकों के परामर्श के बाद ही इन दवाओं का इस्तेमाल किया जाएगा। कम गंभीर रोगों वाले ऐसे कोरोना संक्रमित मरीजों को वार्ड में भर्ती किया जाएगा, जिनका ऑक्सीजन लेवल 93 से कम एवं श्वास गति प्रति मिनट 24 से अधिक होगी।