क्या होता है सीरो सर्वे, जानिए इसके बारें में सबकुछ; शुरुआती रिपोर्ट में संकेत- देश की चौथाई आबादी में कोरोना एंटीबॉडी मिली है

 04 Feb 2021 04:06 PM

नई दिल्ली। देश की कुल आबादी का एक चौथाई हिस्सा यानी 30 करोड़ लोगों में कोरोना एंटीबॉडी मिली है। यह दावा सीरोलॉजिकल सर्वे से जुड़े सूत्रों के हवाले से किया गया है। भारत में अब तक 1 करोड़ 80 हजार लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, जो अमेरिका के अलावा दुनिया के किसी भी देश से सबसे ज्यादा है।

यह सर्वे इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की तरफ से किया गया है। आईसीएमआर का कहना है कि उन्होंने अभी सर्वे के दौरान सामने आए रिजल्ट की जानकारी दी है। सर्वे में कितने लोगों को शामिल किया गया, फिलहाल इसकी जानकारी नहीं दी गई है।

क्या होता है सीरोलॉजिकल सर्वे ?

संक्रामक बीमारियों के संक्रमण को मॉनिटर करने के लिए सीरो सर्वे कराए जाते हैं इन्हें एंटीबॉडी सर्वे भी कहते हैं इसमें किसी भी संक्रामक बीमारी के खिलाफ शरीर में पैदा हुए एंटीबॉडी का पता लगाया जाता है कोरोनावायरस या SARS-CoV-2 जैसे वायरस से संक्रमित मामलों में ठीक होने वाले मरीजों में एंटीबॉडी बन जाती है, जो वायरस के खिलाफ शरीर को प्रतिरोधक क्षमता देती है कोरोनावायरस पहले से मौजूद रहा है, लेकिन SARS-CoV-2 इसी फैमिली का नया वायरस है, ऐसे में हमारे शरीर में पहले से इसके खिलाफ एंटीबॉडी नहीं है, लेकिन हमारा शरीर धीरे-धीरे इसके खिलाफ एंटीबॉडी बना लेता है। इस सर्वे में एक जनसंख्या विशेष (18 साल से अधिक उम्र के लोग) का ब्लड सैंपल, नेज़ल या थ्रोट स्वाब लिया जाता है इसमें उनके सैंपल की जांच करने से पता चलता है कि उनके शरीर में वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनी हैं या नहीं

 

क्या होता है सीरो सर्वे का उद्देश्य?

indian journal of medical research  के मुताबिक, सीरो सर्वे से पता लगाया जाता है कि जिस बीमारी के लिए सर्वे किया जा रहा है, वह जनसंख्या में कितनी आम हो चुकी है संक्रमण असल में कितना फैल रहा है और टेस्टिंग के आंकड़ों के मुकाबले ये आंकड़े कहां हैं इससे पता चलता है कि बिना लक्षण के यह वायरस कितने लोगों में फैल रहा है और ऐसे संक्रमण के कितने मामले हैं, जो बिना सामने आए ठीक हो चुके हैं इसमें कम्युनिटी ट्रांसमिशन और हर्ड इम्युनिटी का पता चलता है। इसके साथ ही संक्रमण के फैलाव का सही-सही अनुमान लगने पर इससे बचाव को लेकर उचित कदम उठाने में मदद मिलती है

 

सीरो सर्वे के नतीजे

सीरो सर्वे में देखा जाता है कि कितने लोगों के शरीर में वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बन चुकी हैं एंटीबॉडी एक तरीके का प्रोटीन होता है, जो वायरस के प्रति शरीर को प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की defination के अनुसार, सीरो सर्वे में लिए गए ब्लड सैंपल में पॉज़िटिव और नेगेटिव आते हैं पॉज़िटिव आने का मतलब है कि व्यक्ति पहले वायरस के संक्रमण की चपेट में आ चुका है और उसके शरीर में वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो चुकी है यही प्रवृत्ति जब बड़ी जनसंख्या में दिखने लगती है, तो इसे हर्ड इम्यूनिटी कहते हैं। वहीं अगर टेस्ट निगेटिव आता है तो इसका मतलब हो सकता है कि या तो वह व्यक्ति वायरस की चपेट में कभी नहीं आया, या वायरस की चपेट में आने के बाद अभी इतना वक्त नहीं हुआ है कि उसके शरीर में एंटीबॉडी बनी हों एक कोरोना मरीज़ के शरीर में एंटीबॉडी बनने में कम से कम एक से तीन हफ्ते का वक्त लगता है