‘जीरो वेस्ट’ सैनिटरी नैपकिन: तेलंगाना के सरकारी स्कूल की दो छात्राओं ने बनाया आयुर्वेदिक खूबियों वाला नैपकिन, पर्यावरण को भी रखेगा सुरक्षित

 05 Jan 2021 04:08 PM

हैदराबाद: हमारे रोजमर्रा की जिंदगी में अलग- अलग तरह का कचरा निकलता है।  इनमें गीला कचरा, सूखा कचरा और नॉन रिसाइकल कचरा भी है। इस नॉन रिसाइकल कचरे में महामारी के दौरान यूज़ किए जाने वाले सैनिटरी नैपकिन भी शामिल है। लेकिन अब तेलंगाना के यादाद्री भुवनगिरि जिले के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले कुछ स्टूडेंट्स ने इसका भी समाधान निकाल लिया है। यहां के स्टूडेंट्स ने कचरे को खत्म करने के मकसद से स्त्री रक्षा पैड्‌स नामक जीरो वेस्ट सैनिटरी नैपकिन बनाया है। खास बात यह है की इन ऑर्गेनिक सैनिटरी पैड को जलकुंभी, मेथी, हल्दी, नीम और साब्जा के बीज का इस्तेमाल कर बनाया गया है।  

इन्फेक्शन के साथ पर्यावरण को भी बचाएंगे नैपकिन 
यह ऑर्गेनिक प्रोडक्ट की पहल जिला परिषद हाई स्कूल मुल्कलपल्ली के स्टूडेंट्स ने की है। इस एक्सपेरिमेंट का हिस्सा रहीं स्टूडेंट स्वाति बताती हैं कि बाजार में मिलने वाले पैड को डिस्पोज करना आसान नहीं होता। ऐसे में इस समस्या को हल करने के लिए, हमने यह नैपकिन ऑर्गेनिक सामान से बनाया है। साथ ही आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले सैनिटरी पैड में कई पेट्रोलियम पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है।  यह पदार्थ आपको इन्फेक्शन का शिकार तो करते ही हैं साथ ही कई पर्यावरणीय समस्याएं भी देते हैं।

कैसे बनाए ऑर्गेनिक सैनिटरी नैपकिन? 

इन ऑर्गेनिक सैनिटरी पैड को बनाने के लिए नीम के पत्तों, मेथी और हल्दी के साथ जलकुंभी का इस्तेमाल किया जाता है।  इन सब के पेस्ट को ठोस बोर्ड बनने तक सुखाया जाता है। फिर इसे एक कॉमन पैड जैसा आकार दिया जाता है। इसे काटकर मधुमक्खी के गोंद की मदद से मेथी और साब्जा के बीज को बोर्ड पर एक साथ जोड़कर कपास की पट्टियों के बीच रखा जाता है और फिर सील कर दिया जाता है।

जलकुंभी क्या है? 
इस प्रोजेक्ट का अहम् हिस्सा रहीं स्वाति बताती हैं की जलकुंभी में आयुर्वेदिक सार होता हैं।  पुराने समय में जब महिलाओं के पास सैनिटरी पैड नहीं होते थे तब वह इसे कपड़े में बांधकर गाय के गोबर के साथ इस्तेमाल करती थीं। हमने इस आयुर्वेदिक खूबियों से भरे जलकुंभी से सैनिटरी पैड बनाने का फैसला किया।