200 कलाकारों ने 17 मातृभाषाओं में दी नृत्य और गायन की प्रस्तुति

 22 Feb 2021 01:35 AM

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर मातृभाषा मंच की और से मातृभाषा समारोह-2 का आयोजन रविवार को किया गया। इस अवसर पर सांस्कृतिक पुनरुत्थान में मातृभाषा की भूमिका विषय पर डॉ. रवीन्द्र कान्हेरे, अध्यक्ष, प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति तथा डॉ. सुनील कुमार, कुलपति, आरजीपीवी वक्ता के रूप में मौजूद थे। इस अवसर पर डॉ. कान्हेरे ने कहा कि जब हमारा समाज संकट में था, पराधीन था तब भारतीय भाषाएं हीं थीं जिन्होंने हमारी संस्कृति को जीवित रखा। तुलसीदास ने अवधी में रामचरितमानस की रचना की, कहने को तो इसे बस एक पुस्तक कह सकते हैं, लेकिन इसी पुस्तक के सहारे लोगों ने राम को, राम के मूल्यों को जिंदा रखा। इसी पुस्तक को साथ लिए भारतीय दुनिया के हर कोने में गए और अपना यह विश्वास बनाए रखा कि कितने भी संकट का समय क्यूं न हो अधर्म पर धर्म की विजय जरूर होती है।

आठ कलाकारों ने किया शिव व गणेश के स्वरूप का वर्णन

कार्यक्रम की शुरूआत डॉ. दाता राम पाठक वेद पाठ से की। उन्होंने विश्व कल्याण के लिए शांति पाठ करते हुए ऋजुवेद मंत्रों का पाठ किया। अगली प्रस्तुति भतनाट्यम नृत्य की हुई। नृत्य गुरु रेवती शास्त्री ने बताया कि आठ शिष्यों ने नृत्य प्रस्तुति दी। प्रस्तुति में कलाकारों ने दिखाया कि भगवान गणेश मूषक की सवारी करते हैं। उनके एक हाथ में लड्डू है। इस प्रस्तुति में अनन्या, इशिता, अमृता, मिहिका, संस्कृति, वैभवी और परनिका शामिल रहीं। इसके बाद श्रीजोनी शिव तांडव स्त्रोतम के माध्यम से शिव के रौद्र रूप को दिखाया।