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सामुदायिक भोज का खाना पकाने में इस्तेमाल होता है ‘काटली’ धातु पात्र

 15 Jun 2021 01:16 AM

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में सप्ताह के प्रादर्श के रूप में रायपुर(छत्तीसगढ़) के धातु के पात्र काटली को दिखाया गया है। इसे संग्रहालय द्वारा 1994 में रायपुर के कमार समुदाय से संकलित किया गया है। संग्रहालय के निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने बताया कि ‘सप्ताह के प्रादर्श’ के अंतर्गत संग्रहालय द्वारा पूरे भारत भर से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है, जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। काटली छत्तीसगढ़ के कमार जनजाति द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला धातु का एक बड़ा पात्र है। कमार पारंपरिक लौह कर्मी के रूप में जाने जाते हैं। पड़ोसी जनजातियां और समुदाय कृषि औजारों और अन्य घरेलू उपकरणों के लिए पूरी तरह से कमारों पर निर्भर हैं। काटली एक विशेष पात्र है जिसे कमारों द्वारा बनाया और उपयोग किया जाता है। इसका मुख्य हिस्सा गोलाकार और मुंह संकरा है। इसे बनाने के लिए मिश्र धातु की पट्टियों को हथौड़े से पीटकर गोलाकार बनाया जाता है। इस तरह के पात्र नवाखाई त्योहार के दौरान सामुदायिक भोज में खाना पकाने के लिए उपयोग किए जाते हैं।