12 साल बाद दोस्त ने पिता के इलाज के लिए मांगी मदद, अरेंज किया ‘O’ पॉजिटिव ब्लड

 08 Jun 2021 01:32 AM

8 जून को नेशनल बेस्ट फ्रेंड डे मनाया जाता है। वैसे तो अमेरिका में बेस्ट फ्रेंड डे मनाया जाता है, लेकिन अब विश्व स्तर भी लोग अपने दोस्तों के साथ ये खास दिन मनाते हैं।कोरोना संकट के बीच दोस्त भले ही एक दूसरे से दूर हैं लेकिन सोशल साइट्स, कॉल के जरिए एक दूसरे को ये महसूस नहीं होने देते कि महामारी भी उनके बीच दूरियां ला सकती है। वैसे तो लगभग हर किसी का कोई न कोई बेस्ट फ्रेंड या सबसे अच्छा दोस्त होता होगा। वहीं, कुछ ऐसे दोस्त भी सामने आए जिन्होंने कोरोना काल में दोस्त को जरूरत पड़ने पर प्लाज्मा डोनेट किया। साथ ही दोस्त के भाई और बचपन की दोस्त के पिताजी की मदद के लिए भी आगे आए। आईएम भोपाल ने ऐसे ही लोगों से बात कर उनके अनुभव जाने।

दोस्त की मां ने बेटे के साथ मेरी भी उतारीआरती,रहा इमोशनल मोमेंट

बात 23 अप्रैल की है , जब शाम को मेरे दोस्त के भाई दीपक जैन का एक्सीडेंट हुआ । उन्हें तुरंत भोपाल फ्रैक्चर हॉस्पिटल में एडमिट किया और उस दिन से भाई वेंटिलेटर पर रहा और 4 मई को से बाहर आया। एक्सीडेंट इतना बड़ा था कि हाथ और पैर की सर्जरी हुई और माइनर हार्ट अटैक आया था। खुशी की बात यह है कि वे 32 दिन बाद ठीक हो गए। उनके इलाज में पूरे 10 लाख 45 हजार खर्चा आया था। इसमें सरकार से भी आर्थिक मदद मिली। जब दीपक डिस्चार्ज हुआ दोस्त की मां ने बेटे के साथ मेरी भी आरती उतारी थी। वह मेरे लिए इमोशनल मोमेंट था। अखिल जैन, बिजनेसमैन

दोस्त हॉस्पिटल में था,उसके पापा को किया प्लाज्मा डोनेट

पीपुल्स समाचार मुझे मार्च में कोरोना हुआ था और कुछ दिन बाद मेरे फ्रेंड अक्षत को भी। वह 32 दिनों तक एडमिट रहा। इसी बीच उसके पिताजी को भी कोविड हुआ और उन्हें प्लाज्मा की जरूरत थी। मैंने एंटी बॉडी टेस्ट करवाया और उन्हें प्लाज्मा डोनेट किया। भगवान की कृपा से सभी ठीक होकर घर आ गए। इस दौरान मेरा दोस्त काफी स्ट्रगल करता रहा और ऐसे में उसने मुझसे मदद मांगी। जितना हो सकता था उतनी हेल्प की। मुश्किल वक्त में दोस्त के काम आ सकते है ं तो इससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता। पीपुल्स समाचार -रोहन भटनागर, बिजनेसमैन

12 साल बाद दोस्त ने फोन कर मांगी मदद, किया ब्लड अरेंज

मैं और मेरी फ्रेंड दीक्षा दुबे हम दोनों बचपन में एक साथ एक ही स्कूल में पढ़ते थे। दरअसल अप्रैल महीने में मेरी फ्रेंड के पापा को पैर में इन्फेक्शन हो गया था। उन्हें ब्लड की रिक्वायरमेंट आरही थी,क्योंकि उनका खून बहुत ज्यादा बह गया था। उन्होंने मेरे ही स्कूल के फ्रेंड को कॉन्टेक्ट किया और मदद मांगी। उसने मेरा रिफ्रेंस दिया और कहा कि उन्हें दो यूनिट ब्लड की जरूरत है। ऐसे में हमने एक यूनिट ओ पॉजिटिव ब्लड तत्काल उप्लब्ध करा दिया। दूसरे दिन फिर ब्लड की जरूरत पड़ी और फिर मदद की । खुशी है कि दोस्त की मदद कर पाया। -आदर्श चतुर्वेदी,कोरियोग्राफर