दिवंगत साहित्यकारों के सम्मान में रचनाकारों ने सुनाए गीत और गजल

 06 Mar 2021 01:20 AM

साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद द्वारा निरंतर सृजन संवाद में 'त्रिवेणी काव्योत्सव' सम्पन्न हुआ। कुक्कुट भवन में कोविड-19 के परिपेक्ष्य में शासन द्वारा जारी निर्देशों के परिपालन करते हुए सभी साहित्यकारों ने अपनेअ पने गीत, गजल और कविताओं की प्रस्तुति दी। यह आयोजन शहर के दिवंगत साहित्यकारों को समर्पित था आयोजन में शहर की सभी साहित्यिक सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रमुख उपस्थित थे। साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने मंचस्थ अतिथियों का स्वागत किया। इस आयोजन में नगर के युवा एवं वरिष्ठ लगभग 100 रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दी।

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गौरवशाली है देश मेरा आलिंद यहां कोना-कोना, जय हिंद का राग अलाप करे अमृत धारा गंगा यमुना, और देश धुनों की राग लिए सुरभित हैं दसों दिशाएं, हम तोड़ के सब धाराएं ध्वज अंबर तक फहराएं। यही काफिला यही समय और अब सच्चा इंसाफ हो भला देश का करने वालों, दिल मन रुख सब साफ हों हो शमा नया हो फिजा खुशियों की चले हवाएं । - अपूर्वा चतुवेर्दी

आज बडा बेगाना लागे जिस आंगन में खेला हूं, सरहद पार से चिट्ठी आयी मां में बहुत अकेला हूं

, याद मुझे आती है गुड़िया और चुन्नू का गाना भी याद मुझे आती है, चुनरी मां और तेरा खाना भी याद मुझे है तू कहती थी मां मैं बड़ा अलबेला हूं, सरहद पार से चिट्ठी आई मां मैं बहुत अकेला हूं। - डॉ प्रार्थना मालवीय