गजल संध्या: ‘उनसे हमें कुछ काम नहीं है, दिल को मगर आराम नहीं है’‘

 11 Jun 2021 01:35 AM

गमक’ का ऑनलाइन प्रसारण सोशल मीडिया प्लेटफोर्म पर किया जा रहा है। जनजातीय संग्रहालय की श्रृंखला के अंतर्गत गुरुवार को उर्दू साहित्य अकादमी द्वारा ‘शाम-ए-गजल’ में भारती विश्वनाथन के गजल गायन का प्रसारण विभाग के यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारित किया गया। विश्वनाथन ने प्रस्तुति में मशहूर शायर खलिश दहलवी की ‘जिंदगी भर कहां करार आया, कब मुझे खुद पर एतबार आया’, मोमिन ‘वो जो हम में तुम में करार था’, निदा फाजली की गजल ‘बदला न अपने आपको, जो थे वही रहे’, जिगर मुरादाबादी की ‘इक लजे मोहोब्बत का इतना सा फसाना है’, वसीम बरेलवी की गजल ‘अपने चेहरे से जो जाहिर है, छुपाए कैसे’ सुनाई। इसी क्रम में शेरी भोपाली की गजल ‘उनसे हमें कुछ काम नहीं है, दिल को मगर आराम नहीं है’ आदि गजलें अपने गायन में प्रस्तुत की। प्रस्तुति के दौरान उनके साथ कीबोर्ड पर आरिफ लतीफ और तबले पर शाहनवाज हुसैन ने संगत दी।