कैंसर का सुना तो दो दिन रोई, फिर बचपन की यादों, इलाज और परिवार के साथ से जंग जीती

 19 Jul 2021 01:16 AM

क्लब लिटराटी और एमरिलिस पब्लिकेशन द्वारा लेखिका मृदुला बाजपेयी की पुस्तक ‘अ हैंडफुल आफ पर्पल स्काई’ पर वर्चुअल बुक रिलीज सेशन आयोजित किया गया। इस मौके पर क्लब की प्रेसीडेंट डॉ. सीमा रायजादा ने पुस्तक पर चर्चा शुरू करने से पहले बताया कि मृदुला बाजपेयी आईआरएस हैं और वर्तमान में प्रिंसिपल कमिश्नर (इनकम टैक्स) हैं। यह पुस्तक कैंसर रोगी की यात्रा के उतार-चढ़ाव को दर्शाती है। बातचीत में सीमा ने मृदुला से उनके अनुभवों और निजी जीवन के इर्द गर्द बुने सवाल पूछे, जिस पर मृदुला ने कहा कि कैंसर के लड़ाई डरने की नहीं, बल्कि ताकत से सामना करने की है। भावनाओं के अलावा और कुछ नहीं हैं, जो हमें बनाती या तोड़ती हैं। कैंसर से जंग में परिवार और दोस्तों का खास रोल रहा। इस सेशन में मंजुल पब्लिशिंग हाउस के एमडी विकास रखेजा सहित 100 दर्शक मौजूद रहे।

पिता की स्मृतियां बनीं ताकत

और दर्द पर भी चर्चा की, जो एक रोगी को सहन करना पड़ता है और यदि देखभाल और सकारात्मकता के साथ इसे नहीं लिया गया तो यह और भी मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि जब मुझे पता चला कि मुझे ब्रेस्ट कैंसर है और काफी एडवांस स्टेज में है तो मैं स्तब्ध रह गई। दो दिन तक आंसुओं में डूबी रही, लेकिन फिर परिवार, दोस्तों व चिकित्सकों ने बीमारी से लड़ने की हिम्मत दी। इससे थोड़े समय में मेरा नजरिया बदलने लगा। मुझे बचपन की यादों ने बड़ी ताकत दी। इस संदर्भ में उन्होंने अपने बचपन के संस्मरणों को भी साझा किया, जो बीमारी के दौरान उन्हें याद आते थे। उन्होंने कहा कि बचपन में जब वे नीली गुलमोहर तोड़कर लाती थीं तो उनके पिता उनका हाथ चूमते हुए स्रेह करते थे। अब तुम्हारे हाथों में पर्पल स्काई है, ऐसा वो कहते थे। इसी वजह है कि इस शीर्षक से किताब लिखी। कीमोथैरेपी व रेडियोथैरेपी के डर को निकालने के लिए खुद को तैयार किया और जीवनशैली में बदलाव किया।