बच्चों की ऑनलाइन  स्टडी पैरेंट्स के लिए बनी सिर दर्द

 06 Apr 2021 12:36 AM

जूम ऐप्स पर पढ़ाई का दूसरा साल शुरू हो चुका है। सोमवार से अधिकांश स्कूल ने अपना नया सेशन शुरू किया तो पेरेंट्स का दिन जूम और माइक्रोसॉμट टीम पर आईडी और पासवर्ड सेट करने में गुजरा। स्कूल द्वारा पेरेंट्स के मोबाइल पर पीडीएफ फाइल्स भेजी गईं ताकि वे सभी कुछ अपने लैपटॉप, डेस्कटॉप व मोबाइल पर सेट कर लें। कोरोना ने इस साल भी बच्चों से उनका क्लासरूम छीन लिया। वहीं एक साल से बच्चों का रिजल्ट भी ऑनलाइन  या स्कूल से जाकर पेरेंट्स कलेक्ट करके लेकर आ रहे हैं तो रिजल्ट आने का उत्साह भी चेहरों से नदारद है, क्योंकि रिजल्ट को लेकर दोस्तों के साथ होने वाले सेलिब्रेशन भी मिसिंग है।कोविड के चलते बच्चों की पढा़ई पैरेंट्स का सिरदर्द बन चुकी है। बच्चों को पढ़ाने के लिए जितना समय बच्चे ऑनलाइन  क्लास में बैठते हैं, अभिभावकों को भी उनके साथ बैठना होता है, क्योंकि छोटे बच्चे खुद से जूम ऐप या माइक्रोसॉμट टीम ऑपरेटर  नहीं कर पाते। टीचर क्या समझा रही हैं यह समझने के लिए पैरेंट्स को भी उनके साथ पूरे समय बैठना होता है। कभी मोबाइल पर नोटिफिकेशन में होमवर्क का मैसेज तो कभी एक्टिविटी प्लान करने का टास्क होता है। बच्चों की पढ़ाई असल में पैरेंट्स की क्लास बन चुकी है, जब तक बच्चे सुबह की क्लास पूरी न कर लें न तो घर को कोई काम शुरू हो पाता है और न ही पैरेंट्स अपने आॅफिशियल वर्क कर पाते हैं। वहीं स्कूल के मासूम दिन 2020 के बाद 2021 में भी बच्चों की जिंदगी से नदारद है, जिसमें उनकी छोटी-मोटी शैतानियां, दोस्तों से लड़ाई-झगड़े, टीचर से इंटरेक्शन तो कभी गलती पर सभी के सामने सॉरी बोलना तो कभी सभी के सामने प्रशंसा पाना गायब हो चुका है। टीचर की तरफ से माइक म्यूट रहता है। इससे बच्चे को टीचर प्लीज रिपीट जैसा विकल्प भी नहीं मिलता।