माखनलाल की आवाज में आज सुनें पुष्प की अभिलाषा

 05 Apr 2021 12:39 AM

कालजयी साहित्यकार, पत्रकार और स्वाधीनता सेनानी दादा माखनलाल चतुर्वेदी की अमर कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ 5 अप्रैल को दुष्यंत कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय में सुनी जा सकेगी। शाम 5.30 बजे यह कविता श्रोता सुन सकेंगे। यह कविता दुष्यंत संग्रहालय में दादा की आवाज में सुरक्षित है। संग्रहालय सोमवार से इस कविता का ‘शताब्दी पर्व’ आयोजित कर रहा है, जो पूरे वर्ष चलेगा। संग्रहालय निदेशक राजुरकर राज ने बताया कि यह कविता दादा माखनलाल जी ने मार्च 1922 में लिखी थी। इस बात का उल्लेख स्वयं दादा ने कविता की भूमिका में किया है। कई लोगों को इस कविता के लेखनकाल में भ्रम है कि इसके सौ वर्ष पूरे हो चुके है। इंटरनेट पर भी इसका लेखनकाल 1921 बताया जा रहा है। यह कविता समारोह में सुनाई जाएगी। इसके साथ ही खंडवा के ‘कर्मवीर’ कार्यालय में दादा द्वारा उपयोग की गई दरी भी संग्रहालय में सुरक्षित है, इसे भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। इस समारोह के मुख्य अतिथि राज्यसभा टीवी के पूर्व कार्यकारी निदेशक एवं वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल होंगे।