लिखंदरा में दिखा भीलों के रहन-सहन के साथ उनका संघर्ष‘

 05 Apr 2021 12:38 AM

मध्य प्रदेश जनजातीय संग्रहालय के ‘लिखंदरा दीर्घा’ में भील समुदाय के चित्रकार रमेश कटारा के चित्रों की प्रदर्शनी ‘शलाका’ में प्रदर्शित की जा रही है। मध्यप्रदेश के जिला झाबुआ के मघरानी गांव में जन्मे रमेश भील क्षेत्र अल्प वृष्टि का क्षेत्र है। इन इलाकों में पानी कम ही होता है, काफी सूखा सा इलाका है। सो समस्त भीलों के जीवन का संघर्ष, जल को लेकर ही है, जो उनके रहन-सहन और कला अभिव्यक्ति में भी देखा जा सकता है। रचनाधर्मिता के लिए बहुत अवकाश इन समुदायों के पास नहीं है। खासकर भील पुरुषों के पास तो बिल्कुल भी नहीं, बशर्ते वे पुजारा अथवा लिखंदरा न हों। अनुष्ठानिक चित्रांकन ‘पिठोरा’ पुरुषों द्वारा ही किया जाता है। रमेश ने देशभर में आयोजित कई चित्र शिविरों, प्रदर्शनियों में अपनी सक्रिय भागीदारी की है। वह भोपाल स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय से वर्तमान में जुड़े हुए है

गोंड पेंटिग में दिखाया पक्षियों का जीवन

गोंड चित्रकार राजेंद्र कुमार श्याम के चित्रों को प्रदर्शित किया गया है। राजेंद्र ने चित्रों में वन्य जीवों व जंगलों को कैनवास पर उकेरा है। राजेंद्र ने बताया कि एक चित्र में उल्लू और चिड़ियों के समूह को कैनवास पर उकेरा है। इस चित्र को तैयार करने में अलग- अलग रंगों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह आकर्षित करते हैं। वहीं एक अन्य चित्र में पक्षियों के दर्द को दिखाया है। जिसमें बैगा जनजातियों के लोग पेड़ पर बैठे पक्षियों का शिकार कर रहे है।