असम के माजुली द्वीप में विवाह के बर्तन बनाने वाला कुम्हार रखता है एक दिन का उपवास

 11 Jun 2021 01:34 AM

माजुली असम की विशाल ब्रह्मपुत्र नदी में एक द्वीप है। सलमोरा गांव माजुली द्वीप के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित है, जो व्यापक पैमाने पर कुम्हार समुदाय द्वारा बसा हुआ है, जो एक कुशल कुम्हार और नाव बनाने में सिद्धहस्त हैं। ऐसा कहा जाता है कि कुम्हारों की प्रारंभिक बस्ती ऊपरी असम में ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर सादिया में थी, और वे 13वीं से 16वीं शताब्दी ईस्वी के दौरान विभिन्न चरणों में मिट्टी के बर्तनों के लिए उपयुक्त मिट्टी की तलाश में इस द्वीप पर चले आए। यह जानकारी दी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने। इस गांव में मिट्टी के बर्तन पारंपरिक रूप से महिलाओं द्वारा हाथ से बनाए जाते हैं। ये विभिन्न प्रकार के उपयोगी बर्तन और सजावटी वस्तुओं का निर्माण इस द्वीप व अन्य गांवों करते हैं।

बर्तन टूटे तो विवाह की तारीख बढ़ती है

कुम्हार बर्तन बनाने के लिए पारंपरिक उपकरणों और औजारों का उपयोग करते हैं। हस्तनिर्मित और चाक से मिट्टी के बर्तनों निर्माण किया जाता है। संग्रहालय एसोसिएट एन.सकमाचा सिंह, ने बताया कि अनुष्ठानिक बर्तन तैयार करने हेतु सामाजिक रीति-रिवाजों और प्रथाओं का उचित रूप से पालन किया जाता है। विवाह समारोह के लिए, अवंतेकेली (पवित्र जल के लिए एक बर्तन) और दहातेकेली (दही के लिए एक बर्तन) नामक विशेष बर्तन तैयार किए जाते हैं। तैयारी के समय कुछ खास बातों का ध्यान रखा जाता है, जो दोनों के वैवाहिक संबंधों से गहराई से जुड़ी होती है। ऐसा माना जाता है कि अगर बनाते समय घड़ा टूट जाए तो विवाह की तिथि आगे बढ़ा दी जाती है।