fb पर कथक के लाइव कॉन्सर्ट तो कोई योग शैली नृत्य कर रहा डिजाइन,ताकि तन-मन को मिले सुकून

 29 Apr 2021 02:04 AM

कोरोना काल का यह समय अब बच्चों और बड़़ों सभी पर भारी पड़ रहा है। डर का माहौल बन चुका है, जिससे अब कोई भी अछूता नहीं है। घर में बंद रहते हुए सभी थक चुके हैं और अब टीवी और मोबाइल से भी उबने लगे हैं, लेकिन डांस का शौक रखते हैं तो यह जरूर इस समय आपका स्ट्रेस बस्टर बन सकता है। डांस को सेहत के साथ जोड़ लें तो लगभग वह सभी फायदे मिलते हैं, जो कि एक्सरसाइज करने से मिलते हैं। इंटरनेशनल डांस डे पर शहर के क्लासिकल डांसर व कोरियोग्राफर अपने स्टूडेंट्स को मोटिवेट कर रहे हैं कि वे रोज आधा घंटा डांस करें ताकि फुल बॉडी मूवमेंट होता रहे।

बना चुकी हूं 350 आनलाइन वीडियो...

पिछले साल मार्च से शुरू हुए कोरोना संक्रमण से लेकर अभी तक फेसबुक पर 350 लाइव कॉन्सर्ट कर चुकी हूं। घर के सारे काम करने के बाद मेरी थकान 4 किलो के घुंघरू, मेकअप और कॉस्ट्यूम पहनकर डेढ़ घंटे नृत्य करके उतरती है, क्योंकि तब मैं भूल जाती हूं कि मेरा शरीर थका व दिमाग कोरोना की दर्दनाक कहानियों से परेशान है। एक करोड़ से ज्यादा दर्शकों ने इस प्रस्तुतियों को देखा है। इसके अलावा देशविदेश में हो रहे आॅनलाइन डांस कॉन्सर्ट में लाइव प्रस्तुतियां दे रही हूं। पंडित भीमसेन जोशी, पंडित जसरज, राशिद खान की बंदिशें अलग-अलग रागों पर इंप्रोवाइजेशन करते हुए पेश कर रही हूं। घर पर ट्रायपॉड लगाकर अपने कथक वीडियो खुद शूट करती हूं, जिसमें साढ़े सात मात्रा, नौ मात्रा, 11, 12 15 मात्रा व साढ़े पांच मात्रा, ताले व फुट वर्क शामिल होता है। सभी से मेरा कहना है जिस भी रिदम पर रुचि हो उस पर डांस करेंगे तो लंग्स भी अच्छे से काम करेंगे, शरीर की कार्यक्षमता बढ़ेगी। यही समय है। अपने आप को फिट और फाइन रख सकते हैं।

नई उम्मीदों से भरता है डांस

मुझे लगता है कि इस समय नृत्य न सिर्फ बच्चों को शारीरिक, बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ रख सकता है। माइंड-बॉडी में कनेक्शन बनता है। सोशल मीडिया पर देखें तो पाएंगे कि इन दिनों बड़ी संख्या में बच्चे-किशोर-युवा ‘डांस मूवमेंट थेरेपी’ का हिस्सा बन रहे हैं। डांस में वह खूबी है कि वह व्यक्ति को नई ऊर्जा एवं उम्मीदों से भर देता है। क्रिएटिव मूवमेंट थेरेपी, जिसे डांस मूवमेंट थेरेपी भी कहते हैं, इसमें शरीर के मूवमेंट के साथ व्यक्ति के शारीरिक, भावनात्मक, कॉग्निटिव एवं सामाजिकता पर फोकस किया जाता है। उससे होने वाली अनुभूति से इंसान मन से सुकून महसूस करता है। इसमें कोई तकनीकी डांस स्टेप नहीं होता, बल्कि डांस थेरेपिस्ट भारतीय शास्त्रीय नृत्यों एवं लोक नृत्यों से युक्त क्रियाओं का समावेश होता है। 1984 से बैले डांस कर रही हूं तो जानती हूं कि डांस करते समय इंसान सब कुछ भूल जाता है। मैं योग नृत्य शैली में डांस तैयार कर रही हूं, जिसमें बैले व योग का समावेश है। इसमें श्लोक, सप्त चक्र जागृत करना तैयार कर रही हूं।