साहित्य समाज का दर्पण नहीं अपितु शृंगार है:शर्मा

 22 Feb 2021 01:37 AM

पश्चिम से उधार ली आधुनिकता ने हमें अपने ज्ञान के मूलाधारों से भटका दिया है। यह बात पद्मश्री अलंकरण हेतु चयनित लोक संस्कृतिवेत्ता कपिल तिवारी ने मध्यप्रदेश लेखक संघ के स्वर्ण जयंती समारोह में व्यक्त किए । भाषा और साहित्य के नाम पर हो रहे राजनितिक छलावे और खेमेबाजी के प्रति दु:ख प्रकट करते हुए कुछ और रचने के पहले खुद को रचने का आह्वान किया । समारोह के सारस्वत अतिथि संतोष चौबे ने कहा कि हिंदी साहित्य का सारा रस माधुर्य बोलियों से ही उपजा है। यह माधुर्य और भीगापन धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है, लेकिन कस्बाई रचनाकारों ने इसे अभी तक कायम रखा है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण नहीं अपितु शृंगार है जो दर्पण में उसकी छवि का सुधरा हुआ रूप दिखाता है । ऐसा साहित्य रचे जिसमें लोकहित व लोककल्याण निहित हो।