सप्ताह का प्रादर्श: सेला नृत्य में पुरुष नर्तक पहनते हैं लकड़ी का दो मुंह का मुखौटा ‘खिसरा’

 08 Jun 2021 01:35 AM

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय द्वारा ‘सप्ताह का प्रादर्श’ के अंतर्गत ‘खिसरा’ दो मुंह वाले लकड़ी के मुखौटे का प्रदर्शन किया गया। यह सरगुजा (छत्तीसगढ़) के रजवार समुदाय से 1995 में संकलित किया गया था। संग्रहालय के निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने बताया कि खिसरा लकड़ी का एक दो मुंह वाला मुखौटा है, जिसे छत्तीसगढ़ के रजवार समुदाय के पुरुषों द्वारा सैला नृत्य के समय उपयोग किया जाता है।

दाल अर्पित कर खिसरा का अभिवादन करते ह

खिसरा शब्द का अर्थ एक विदूषक है, जो एक नर्तक समूह में मुखौटा पहनकर लोगों को हंसाता है। यह मुखौटा स्थानीय बढ़ई द्वारा हल्दू और सज्जा की लकड़ी से बनाया जाता है। खूबसूरत पगड़ी पहने 40-50 लोगों की टोली खिसरा के साथ चलती है और गांव वालों का मनोरंजन करती है। गांव के लोग चावल, दाल और सब्जियां अर्पित कर खिसरा का अभिवादन करते हैं।