हौसला बढ़ाने के लिए पढ़ रहे मोटिवेशनल बुक्स,ऑडियो  और ई- बुक्स भी बनीं चॉइस

 23 Apr 2021 12:25 AM

कोरोनाकाल में बुक रीडिंग का चलन फिर से बढ़ा है। हाथ में थामे किताब पढ़ना हो या पेड ऐप पर, लेकिन सभी को कुछ न कुछ पढ़ने का शौक पैदा जरूर हुआ है। वे लोग जिनकी रीडिंग हैबिट बहुत रेगुलर नहीं थी अब वे भी बुक्स पढ़ने में रुचि दिखाने लगे हैं। आॅनलाइन बुक स्टोर्स पर पर रीडर्स को न्यू अराइवल्स से लेकर बेस्टसेलर्स और न्यू रिलीज जैसे विकल्पों के बीच अपने रीडिंग चॉइस के मुताबिक किताबें मिल रही हैं। हाल में देश- दुनिया में पहचान रखने वाली शख्सियतों की किताबें रिलीज हुईं, जिसमें से अधिकांश पाठक इंस्पिरेशन व मोटिवेशनल किताबें पढ़ रहे हैं, वहीं बच्चे एडवेंचर आॅफ साइंस बेस्ड बुक्स पसंद कर रहे हैं।

कॉमिक्स का कमबैक, ई- प्लेटफॉर्म से हो रही डाउनलोड

नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव, इंफेक्टेड, कदम-कदम पर खतरा-कोबी और भेड़िया, नागराज और चाचा चौधरी और साबू के कारनामे, पिंकी बिल्लू,राका, कमांडो ध्रुव एक बार फिर घर-घर पढ़े जा रहे हैं। 30 प्लस यंगस्टर्स जरूर इन नामों से परिचित होंगे, लेकिन अब नई जेनरेशन भी इनसे अंजान नहीं रही है। लॉकडाउन ने हर पुराने सामान, खेल से लेकर, पुरानी कॉमिक्स का कलेक्शन तक दोबारा सामने ला दिया है। अब यह भले ही किताब की शक्ल में न हो, लेकिन अब यह डिजिटल प्लेटफॉर्म में लोगों का मनोरंजन कर रही हैं। कोई इन्हें अपने मोबाइल पर पढ़ रहा है तो कोई लैपटॉप पर। लोगों में कॉमिक्स का उत्साह ऐसा है कि यह वॉट्सऐप पर तेजी से एक-दूसरे को भेजी जा रही है। 10 से 20 और कॉमिक्स के अलग-अलग सेट में कलेक्शन वायरल हो रहे हैं। वहीं ई-प्लेटफॉर्म पर भी यह फ्री डाउनलोड के लिए उपलब्ध हैं।

आॅडियो बुक्स का चलन

ई-बुक्स और ऑडियो  बुक्स को तवज्जो दिया जा रहा है। किताब पढ़ने के शौकीन तो फिजिकल या ई-बुक्स के जरिए अपना मन बहला रहे हैं, लेकिन नॉन-रीडर्स के पास इतना धैर्य नहीं होता कि वे लगातार किताबें पढ़ सकें। जबकि कई बार वे किताबें पढ़ना चाहते हैं, लेकिन आदत न होने के चलते यह रूटीन नहीं बन पाता, ऐसे रीडर्स के लिए ऑडियो  बुक्स नया विकल्प बनकर उभरा है। यह रीडर्स को आजादी देतीं हैं कि वे जब चाहें ,जहां चाहे अपने मोबाइल की प्लेलिस्ट से अपनी पसंद की आॅडियो बुक सुनना शुरू कर दें। पब्लिशर्स कानों को अच्छी लगने वाली आवाजों को जरिए बुक्स को रिकॉर्ड कराते हैं, जिसमें अमेजन, ऑडियो  बुक्स.डॉट.कॉम, स्टोरीटेल जैसी कंपनियां सर्विस दे रही हैं। यहां तक की ऑडियो  बुक गिμट करने जैसे आॅप्शंस तक दिए जा रहे हैं। रीडर्स बॉडी, माइंड और सॉल, वेलनेस, फिक्शन, नॉन-फिक्शन बुक्स को इन दिनों ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

अन्य भाषाओं में ‘प्रतिलिपि’ पर कहानियां करेंगे पेश

मंजुल पब्लिशिंग हाउस ने लॉकडाउन में ही देश के सबसे बड़े डिजिटल साहित्य प्लेटफॉर्म प्रतिलिपि के साथ संयुक्त उपक्रम एकत्र की शुरूआत की है। यह नया इम्प्रिंट प्रतिलिपि के प्रतिभाशाली लेखकों की किताबों को प्रकाशन प्रिंट और ई-बुक दोनों स्वरूपों में पेश करेगा। हिंदी व मराठी सहित अन्य भाषाओं में पढ़ने को मिलेंगी। -नेहा श्रीवास्तव, एडिटर, मंजुल पब्लिशिंग हाउस

ऑनलाइन  बुक हुए डिस्कशन के 60 सेशन

बुक रिलीज होने पर अब पाठकों तक पहुंचने के लिए हम आॅनलाइन बुक डिस्कशन आयोजित करते हैं, जिससे पाठक किताब के लेखक से मिलकर सवाल-जवाब कर पाते हैं। यह इवेंट पहले फिजिकली होते थे अब दुनिया भर में ऑनलाइन  हो रहे हैं। लोगों की रीडिंग चॉइस भी इस माध्यम से पता चलती हैं। अभी तक 60 से ज्यादा सेशन कर चुके हैं।-दीपाली गुप्ता, एडिटर, इंद्रा पब्लिशिंग हाउस

यूनेस्को ने की शुरुआत

यूनेस्कों ने 23 अप्रैल 1995 को इस दिवस को मनाने की शुरुआत की थी। पेरिस में यूनेस्को की एक आमसभा में फैसला लिया गया था कि दुनिया भर के लेखकों का सम्मान और श्रद्धांजलि देने व किताबों के प्रति रुचि जागृत करने के लिए हर साल विश्व पुस्तक दिवस मनाया जाएगा, जिसके जरिए दुनियाभर में साक्षरता को बढ़ावा देना भी एक मकसद है।

टेलीग्राम पर शेयर हो रहीं किताबें

इसी तरह लोग किताबों की पीडीएफ फाइल्स भी एकदूसरे को फॉरवर्ड कर रहे हैं। इसमें प्रेमचंद की कहानियां तो सबसे ज्यादा शेयर की जा रही हैं। किताबें पढ़ते हुए लोग तनावमुक्त महसूस करते हैं। इसके अलावा भी कई तरह की कहानियों और कविताओं की बुक्स आपस में शेयर की जा रही हैं, ताकि कोई घर में किसी को बोरियत नहीं हो। वहीं, आॅनलाइन प्लेटफार्म लॉकडाउन के मद्देनजर बच्चों के लिए नि:शुल्क किताबें पढ़ने एवं उन्हें मुμत डाउनलोड करने की सुविधा दे रहे हैं। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास अपनी चुनिंदा और लोकप्रिय किताबों को मुμत में डाउनलोड कराने की सुविधा मुहैया करा रहा है। -महेश सक्सेना, बाल साहित्यकार

बेटे के साथ शेयर कर रहा हूं ई-कॉमिक्स

मेरे पास ई-कॉमिक्स का कलेक्शन हैं, जिसे उन्होंने मेरे साथ शेयर किया है। मैं उनकी शेयर की यह कॉमिक्स पढ़ रहा हूं साथ ही मेरा बेटा भी इन कॉमिक्स को पढ़ रहा है, इससे पहले उसने यह कॉमिक्स नहीं पढ़ी थी,क्योंकि यह हमारे समय की कॉमिक्स थी। अच्छा लग रहा है कि पुराने समय की बातों को एक बार फिर एंजॉय कर पा रहे हैं। - शैलेंद्र रावत, केमिस्ट्री फैक्लटी