नाटकों में मानव जीवन की त्रासदी को दर्शाया

 16 Oct 2020 01:00 AM  118

चेतना रंगसमूह के तीन दिवसीय नाट्य समारोह के अंतिम दिन गुरुवार को अंतोव चेखव की दो कहानियों ‘एक डूबा हुआ आदमी’ और ‘एक अकेली औरत’ पर आधारित नाटक ‘समंदर का किनारा’ का मंचन किया गया। इसका निर्देशन युवा रंगकर्मी सुशीलकांत मिश्रा ने किया। नाटक में दिखाया गया कि आज के समय में महिला अपने आप को असुरक्षित महसूस करती है और दुनिया में जीने से डर रही है। उसका समाज और सिस्टम से भरोसा उठ गया है। कोई उम्मीद की किरण दिखाई नहीं दे रही है। लोगों की अलग-अलग त्रासदियां नाटक के जरिए दिखाई गईं। नाटक के एक भाग में दिखाया गया कि एक ऐसा व्यक्ति है जो पेट पालने के लिए पानी में डूबने का खेल दिखाता है, जबकि उसे तैरना नहीं आता। इसी के चलते वह एक दिन सच में डूब जाता और उसकी जान चली जाती है। लेकिन दर्शक इसे मनोरंजन समझकर तालियां बजाते हुए अपने घर लौट जाते हैं।