चमकाने अपनी राजनीति, बदनाम कर रहे अभियान

 12 Jan 2021 01:16 AM

भी कुछ दिन पहले समाचार पत्रों में पढ़ा की पीपुल्स अस्पताल में एक व्यक्ति की कोरोना का टीका लगवाने के बाद मौत हो गई। डॉक्टर होने के नाते बात की गहराई में जाने की इच्छा हुई। पता ये चला कि उसकी मौत दूसरा डोज लगने के भी काफी समय बाद हुई है और उसके पोस्ट मार्टम में उसकी मौत जहर के कारण हुई है। मगर जो डैमेज होनी थी, वो तो समाचार पत्रों के इन तथाकथित बुद्धिजीवी पत्रकारों ने कर ही दी। बिना बात की सच्चाई जाने इसका परिणाम क्या होगा। लोग वैक्सीन लगवाने से डरने लगेंगे। अभी तो यह भी पक्का नहीं हुआ है कि उसे सही में वैक्सीन लगा भी था या नहीं। ये एक ब्लाइंड ट्रायल है, जिसमें आधे लोगों को सही का वैक्सीन दिया गया था और आधे लोगों को सिर्फ डिस्टिल वॉटर। क्या बिना किसी प्रमाण के एक जन उपयोगी अभियान को बदनाम करना उचित है? क्या बेहतर नहीं होता कि पेपर मे छापने से पहले कम से कम ये तो पता कर लिया जाना चहिए था कि उसे सही में वैक्सीन दिया गया था। बिना असलियत पता करे, बिना बात की तह तक गए एक चटपटी न्यूज बनाने के लिए यह हरकत क्या मानवता के खिलाफ नहीं है। कल को यदि ये बात सामने आती है कि उसे ब्लाइंड ट्रायल में डिस्टिल वॉटर दिया गया था तो फिर क्या न्यूज झूठी पाए जाने पर उन्हें कोई सजा का प्रावधान होगा। नहीं, हमारे यहा फेक न्यूज पर कोई सजा नहीं है। चाहे जिसकी टोपी उछाल दीजिए। बड़े-बड़े अक्षरों मे चटपटी न्यूज छापिए हद से हद बाद में बारीक अक्षरों में खेद प्रगट कर दीजिए कि यह तो हमें सूत्रों से प्राप्त हुआ था। फिर इसमें कूद पड़े अपनी नेतागिरी चमकाने वाले छुटभैया नेता लोग, जिन्हें पीपुल्स अस्पताल से चंदे के नाम पर वसूली नहीं मिल रही होगी, वो बढ़-चढ़ कर अस्पताल को दोष देने में लग गए। जबकि ये एक आईसीएमआर का प्रोजेक्ट था। अस्पताल तो इसमें मात्र सहयोग कर रहा था। जब भी कोई वैक्सीन लाई जाती है, तब उसका परीक्षण इसी प्रकार करना होता है। जब चेचक का टीका आया था, तब एडवर्ड जेनर ने फिलिप के ऊपर इसका प्रयोग किया था। इसी प्रकार पोलियो के टीके का प्रयोग 1.6 मिलियन बच्चों पर किया गया था। इसका एक निश्चित प्रोटोकाल होता है, जिसका पालन करने के बाद ही वैक्सीन सफल मानी जाती है। फिर शुरू हो गई मुआवजे की मांग और मुआवजे के लालच में मरीज के परिवार वालों ने भी नेताओं के सुर में सुर मिला कर साथ देना शुरू कर दिया। ये वही नेता हैं, जो कल तक चिल्ला रहे थे कि पीएम मोदी ताली-थाली बजवा रहे हैं, वैक्सीन कब लाएंगे। जब वैक्सीन आ रही है तो रोड़े लगा रहे हैं। आज पूरा विश्व हम पर भरोसा कर रहा है। हमसे वैक्सीन मांग रहा है और हम अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए अपनी ही वैक्सीन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।