पंजाबियों ने गिद्दा कर लोहड़ी मनाई, तमिलों का रंगोली के साथ बिहू पर्व शुरू

 14 Jan 2021 01:17 AM

सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। यह परिवर्तन साल में एक बार आता है। सूर्य के धनु राशि से मकर राशि पर जाने का महत्व इसलिए अधिक है कि इस समय सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायन हो जाता है। उत्तरायन देवताओं का दिन माना जाता है। उत्तर भारत से लेकर दक्षित भारत यह त्योहार अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। तमिलनाडु में यह पोंगल, पंजाब में लोहड़ी, असम में बिहू और बिहार में खिचड़ी के नाम से जाना जाता है। लेकिन सभी इसे फसल, पशुधन व सुख-समृद्धि, धन- धान्य की प्राप्ति घर में बनी रहे, इस विचार के साथ मनाते हैं। मकर संक्रांति 14 से लेकर 15 जनवरी तक मनाई जाएगी वहीं पोंगल के रूप में यह 17 जनवरी तक मनाया जाएगा।

शादी के बाद पहली लोहड़ी मनाई

शादी के बाद यह मेरी पहली लोहड़ी थी। जीवन साथी के साथ यह पर्व मनाया तो अलग ही खुशी थी। पहले लग रहा था कि कोरोना के कारण हम यह उत्सव मना भी सकेंगे या नहीं! नए जोड़े के लिए यह त्योहार सबसे खास होता है, क्योंकि सुख-शांति व समृद्धि का प्रतीक है।

तिलकूट और नारियल के लड्डू बनाए

मकर संक्रांति पर हर साल कैंपस में पतंगबाजी का आयोजन करते थे, लेकिन इस बार 22 जनवरी को कार्यक्रम होगा। इसमें लंबे समय बाद सभी एक दूसरे से मिलेंगे। घर पर में तिलकूट, नारियल के लड्डू बनाए हैं ।

जिन परिवारों में बच्चे हुए, उनके लिए खास

यह त्योहार खासतौर नए शादीशुदा जोड़े व बच्चों के जन्म वाले परिवारों के लिए बहुत खास होता है। इस त्योहार में रेवड़ी, पॉपकॉर्न और मूंगफली खाने का और यही लोगों को प्रसाद में देने की विशेष परंपरा है।

चार दिन तक मनाएंगे पोंगल

हमारा परिवार तमिलनाडु से है, इसलिए पारंपरिक रूप से चार दिन तक पोंगल मनाते हैं। पहले दिन बोंगी पोंगल में मारिय्यम माता की पूजा होती है। इस दिन व्रत रखा जाता है। दूसरे दिन ,सूर्य पोंगल, तीसरे दिन माट पोंगल, में गाय की पूजा करते हैं और चौथे दिन करनाल पोंगल, में स्वादिष्ट व्यंजन बनाकर परिवार के साथ खेल खेले जाते हैं।