लॉकडाउन में लिखी नई कहानियों पर रंगकर्मियों को गाइडलाइन का इंतजार

 10 Jun 2021 01:39 AM

लगभग ढाई महीने से चल रहा कोरोना कμर्यू गुरुवार से खत्म हो रहा है। ऐसे में शहर के रंगकर्मी भी उत्साहित हैं कि लंबे समय से रंगमंच से दूर शहरवासियों का मनोरंजन कर सकेंगे। कुछ रंगकर्मियों के नाटक तो लॉकडाउन से पहले ही कैंसिल हो गए थे। हालांकि थिएटर को लेकर अभी कोई गाइडलाइन नहीं आई है, लेकिन रंगकर्मियों ने अपनी तरफ से तैयारी कर रखी है। रंगकर्मियों का मानना है कि इस बार जब थिएटर नाटकों के मंचन के लिए खुलेंगे तो स्टेज से लेकर आॅडियंस तक सोशल डिस्टेंसिंग रखेंगे। नाटक में भी कास्टिंग ऐसी ही की गई है,जहां कम कलाकारों में ही नाटकों का मंचन हो सके। साथ ही कुछ रंगकर्मियों ने अपने कोरोना के अनुभवों को भी नाटक का रूप दिया है, जिसे वे जल्द से जल्द मंचित करना चाहते हैं। बस गाइडलाइन का इंतजार है।

नए नाटक तैयार हैं, मंचन का मौका मिल्

लॉकडाउन से पहले मेरे चार शो लाइनअप थे,लेकिन सभी कैंसिल करने पड़े। अब अनलॉक होने के बाद से कुछ नाटकों की रिहर्सल फिर से करेंगे। ‘भागवंती भाग’... जो एक कॉमेडी नाटक है और ‘भीतरी दीवारें’ इमोशनल नाटक है। उसके दो शो लाइनअप थे। इन्हें हम दोबारा शुरू करेंगे। उस समय रिहर्सल भी कर ली थी। साथ ही आने वाले समय में रीता वर्मा का नाटक ‘लाइफ इन फोन’ और योगेश त्रिपाठी का लिखा नाटक ‘चौथी सिगरेट’ फिर से रिवाइव कर आॅडियंस के लिए नया नाटक तैयार है। जब भी थिएटर आर्टिस्ट्स के लिए मौका मिलेगा हम जरूर भोपाल की आॅडियंस को दिखाएंगे। -राजीव वर्मा,वरिष्ठ रंगकर्मी

दिव्यांग बच्चों के साथ कर रहे वर्कशॉप

जो इस समय लॉकडाउन हुआ था, इसमें एक वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए एक दूसरे को लिटरेचर से जुड़ी किताब और ड्रामा स्क्रिप्ट्स शेयर की। ग्रुप में जुड़े यंगस्टर्स का साहित्य के प्रति रुझान तो बढ़ा ही साथ में उनकी भाषा पर भी सुधार हुआ है। हम गुज्ज भाई के लिखे नाटक ‘देव स्वप्न’ उपन्यास पर नाटक की तैयारी भी कर रहे हैं। - सौरभ अनंत, रंगकर्मी

स्व. सुनील मिश्र के नाटक ‘शबरी’ से दूंगी श्रद्धांजलि

मैं आमतौर पर बच्चों को लेकर नाटक करती हूं, लेकिन अभी कोई नाटक की प्रैक्टिस नहीं करूंगी। इस बार बड़े रंगकर्मियों के साथ स्व. सुनील मिश्र के लिखे नाटक ‘शबरी’ का मंचन करूंगी। सुनीलजी के निधन की खबर से मैं बहुत स्तब्ध हूं। स्टेज पर सबसे पहले ‘शबरी का ही मंचन होगा, जो उन्हें मेरी श्रद्धांजलि होगी। -वैशाली गुप्ता, रंगककर्मी

नाटकों में सिर्फ चार लोग ही होंगे कास्ट

मुझे अप्रैल में कोरोना हो गया था। इसी को ध्यान में रखते हुए मैंने इस बार डिसाइड किया है कि किसी भी नाटक में चार से ज्यादा कास्ट नहीं करूंगा। मैंने इस दौरान दो नाटकों को लिखा है। एक तो हॉस्पिटल के नेग्लिजेंस पर है, जहां बुजुर्ग कपल की कहानी है। इसमें वाइफ की मृत्यु हो जाती है फिर पति न्याय के लिए लड़ता है। वहीं दूसरा नाटक मैंने मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘बड़े भाई साहब’ का नाट्य रूपांतरण किया है। इसमें मैंने सिर्फ चार बच्चों को कास्ट किया है। जिस तरह से बात हो रही है कि तीसरी लहर आने वाली है इसको ध्यान में रखते हुए मैं अपने नाटकों में ज्यादा कास्टिंग नहीं करूंगा। - आशीष श्रीवास्तव, रंगकर्मी